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माला हों या मायाजाल, ममता हो या मेह्जबीन का आँचल...
वोह जो हम में तुम में करार था
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वो ही यँनी वाडा निबाह का
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वो नये गीले वो शिकायतें
वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना
तुम्हे याद हो के ना याद हो
कभी हम मे तूमे मे भी चाह थी
कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम से थे आशना
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वोह जो हम में तुम में करार था
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वो ही यँनी वाडा निबाह का
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वो नये गीले वो शिकायतें
वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना
तुम्हे याद हो के ना याद हो
कभी हम मे तूमे मे भी चाह थी
कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम से थे आशना
तुम्हे याद हो के ना याद हो

Very Nice.
ReplyDeleteThanks
nice one
ReplyDeleteawesome shayar Momin !
ReplyDeleteHey Abhi awesome, i cant believe u wrote tht..after all these yrs...Do I read something between the lines...??take care...
ReplyDeleteme too mamta
ReplyDeletelol..Smitaaaaaaaaaa
ReplyDeletekya baat hai sir.....
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