5.10.10

वोह जो हम में तुम में कर...

___________
माला हों या मायाजाल, ममता हो या मेह्जबीन का आँचल...

वोह जो हम में तुम में करार था
तुम्हे याद हो के ना याद हो

वो ही यँनी वाडा निबाह का
तुम्हे याद हो के ना याद हो

वो नये गीले वो शिकायतें
वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना
तुम्हे याद हो के ना याद हो

कभी हम मे तूमे मे भी चाह थी
कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम से थे आशना
तुम्हे याद हो के ना याद हो

7 comments:

  1. awesome shayar Momin !

    ReplyDelete
  2. Hey Abhi awesome, i cant believe u wrote tht..after all these yrs...Do I read something between the lines...??take care...

    ReplyDelete
  3. lol..Smitaaaaaaaaaa

    ReplyDelete
  4. kya baat hai sir.....

    ReplyDelete