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दायाँ पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूँ मैं
खाक ऐसी ज़िंदगी पे के पट्थत नही हूँ मैं
यारब ! ज़माना मुझ को मिताता है किस लिए
लौह-ए-जहाँ पे हरफ़-ए-मुक़र्रर नही हूँ मैं
क्यूँ गर्दिश-ए-मुदाम से घबरा ना जाए दिल
इंसान हूँ, प्याला-ओ-सागर नही हूँ मैं
हद चाहिए सज़ा में उक़ूबत के वास्ते
आख्हिर गुनाहगार हूँ काफ़िर नही हूँ मैं
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फ़नकार : हरिहरन
فنکار : جگجت سنگ
शायर : मिर्ज़ा गालिब
شایر : مرزا گالب
खाक ऐसी ज़िंदगी पे के पट्थत नही हूँ मैं
यारब ! ज़माना मुझ को मिताता है किस लिए
लौह-ए-जहाँ पे हरफ़-ए-मुक़र्रर नही हूँ मैं
क्यूँ गर्दिश-ए-मुदाम से घबरा ना जाए दिल
इंसान हूँ, प्याला-ओ-सागर नही हूँ मैं
हद चाहिए सज़ा में उक़ूबत के वास्ते
आख्हिर गुनाहगार हूँ काफ़िर नही हूँ मैं
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फ़नकार : हरिहरन
فنکار : جگجت سنگ
शायर : मिर्ज़ा गालिब
شایر : مرزا گالب

Gr8 composition.....thanks for the tag.
ReplyDeletei love cea!
ReplyDeletebahut khub ..Hariharan is gr8!
ReplyDeleteDAYAM PARHA HUA TERE DAR PAR NAHI HUN MAIN.....AMAZING.
ReplyDeleterealy its heart touches.... gr8
ReplyDeleteAbhi..is it you appearing on the stage? and Jagjit singh's voice..?
ReplyDeleteyes..
ReplyDeleteक्यूँ गर्दिश-ए-मुदाम से घबरा ना जाए दिल,
ReplyDeleteइंसान हूँ, प्याला-ओ-सागर नही हूँ मैं..
बहुत खूब ...गझल बहुत खूब graphics...thanksss !
really good one
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