22.11.10

"नौकर नही हूं मैं"

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दायाँ पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूँ मैं
खाक ऐसी ज़िंदगी पे के पट्थत नही हूँ मैं

यारब ! ज़माना मुझ को मिताता है किस लिए
लौह-ए-जहाँ पे हरफ़-ए-मुक़र्रर नही हूँ मैं

क्यूँ गर्दिश-ए-मुदाम से घबरा ना जाए दिल
इंसान हूँ, प्याला-ओ-सागर नही हूँ मैं

हद चाहिए सज़ा में उक़ूबत के वास्ते
आख्हिर गुनाहगार हूँ काफ़िर नही हूँ मैं
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फ़नकार : हरिहरन
فنکار : جگجت سنگ
शायर : मिर्ज़ा गालिब
شایر : مرزا گالب

9 comments:

  1. Gr8 composition.....thanks for the tag.

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  2. bahut khub ..Hariharan is gr8!

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  3. DAYAM PARHA HUA TERE DAR PAR NAHI HUN MAIN.....AMAZING.

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  4. realy its heart touches.... gr8

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  5. Abhi..is it you appearing on the stage? and Jagjit singh's voice..?

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  6. क्यूँ गर्दिश-ए-मुदाम से घबरा ना जाए दिल,
    इंसान हूँ, प्याला-ओ-सागर नही हूँ मैं..
    बहुत खूब ...गझल बहुत खूब graphics...thanksss !

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