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देखना उनका कनखियो से इधर देखा किये
अपनी आहें कम असर का हम असर देखा किये
जो बा-ज़ाहिर हमसे सदियों की मुसाफत पर रहें
हम उन्हें हर गाम अपना हमसफ़र देखा किये
लम्हा-लम्हा वक़्त का सैलाब चढ़ता ही गया
रफ़्ता-रफ़्ता डूबता हम अपना घर देखा किये
कोई क्या जाने के कैसे हम भारी बरसात में
नज़रें आतिश अपने ही दिल का नगर देखा किये
सुन के वो ‘शहज़ाद’ के आसार सर धुनता रहा
थाम कर हम दोनों हाथों से जिगर देखा किये
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शायर : फरहत शेहज़ाद
फनकार : महेंदी हसन
अपनी आहें कम असर का हम असर देखा किये
जो बा-ज़ाहिर हमसे सदियों की मुसाफत पर रहें
हम उन्हें हर गाम अपना हमसफ़र देखा किये
लम्हा-लम्हा वक़्त का सैलाब चढ़ता ही गया
रफ़्ता-रफ़्ता डूबता हम अपना घर देखा किये
कोई क्या जाने के कैसे हम भारी बरसात में
नज़रें आतिश अपने ही दिल का नगर देखा किये
सुन के वो ‘शहज़ाद’ के आसार सर धुनता रहा
थाम कर हम दोनों हाथों से जिगर देखा किये
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शायर : फरहत शेहज़ाद
फनकार : महेंदी हसन
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Sayeed Gilaani
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21.5.12
5/21/2012 04:08:00 PM
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कैसे चुपाउँ राज़-ए-ग़म दीदार-ए-तार को क्या करू
दिल की तपिश को क्या करू सोज़-ए-जिगर को क्या करू ?
शोरिश-ए-आशिकी कहाँ और मेरी सादगी कहाँ
हुसं कों तेरे क्यां कहूँ अपनी नज़र कों क्यां कहूँ ?
गम का न दिल में हो गुज़र वस्ल की शब् हो यूँ बज़र
सब ये कुबील हैं मगर खौफ-ए-सहर को क्यां करूँ ?
हाल मेरा था जब बतर तब ना हुई तुम्हें खबर
बाद मेरे हवा असर अब मैं असर कों क्यां कहूँ ?
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शायर : सलीम गिलानी
फनकार : महेंदी हसन
दिल की तपिश को क्या करू सोज़-ए-जिगर को क्या करू ?
शोरिश-ए-आशिकी कहाँ और मेरी सादगी कहाँ
हुसं कों तेरे क्यां कहूँ अपनी नज़र कों क्यां कहूँ ?
गम का न दिल में हो गुज़र वस्ल की शब् हो यूँ बज़र
सब ये कुबील हैं मगर खौफ-ए-सहर को क्यां करूँ ?
हाल मेरा था जब बतर तब ना हुई तुम्हें खबर
बाद मेरे हवा असर अब मैं असर कों क्यां कहूँ ?
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शायर : सलीम गिलानी
फनकार : महेंदी हसन
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4.7.11
7/04/2011 05:42:00 PM
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ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशजी का नाम ना लो
क्या इंशजी सौदाई हैं
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
है लाखों रोग ज़माने में
क्यों इश्क़ है रुसवा बेचारा
हैं और भी वजे वहशत की
इंसान को रखती दुखियारा
हन बेकल बेकल रहता है
वो प्रीत में जिस ने दिल हरा
पर शाम से लेकर सुबो तलाक़
यून कौन फिरे है आवारा
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
गर इश्क़ किया है तब क्या है
क्यों शाद नहीं आबाद नहीं
जो जाम लिए बिन चल ना सके
ये ऐसी भी उस्ताद नहीं
फाइंड मोरे लिरिक्स अट ववव.स्वीत्सल्यरीक्स.कॉम
ये बात तो तुम भी मानो गे
वो कैस नहीं फरहाद नहीं
क्या हिजर का दारू मुश्किल है
क्या फास्ल मुस्ते याद नहीं
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
जो हम से कहो हम करते हैं
क्या इंशा को समझना है
उस लड़की से भी कहलेंगे
गो अब कुच्छ और ज़माना है
या छ्चोड़ें या तकमील करें
ये इश्क़ है या अफ़साना है
ये कैसा गोरख धनदा है
ये कैसा तानाबाना है
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशजी का नाम ना लो
क्या इंशजी सौदाई हैं
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
ये बातें, ये बातें
______________
फनकार/मौसीकार : गुलाम अली
ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशजी का नाम ना लो
क्या इंशजी सौदाई हैं
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
है लाखों रोग ज़माने में
क्यों इश्क़ है रुसवा बेचारा
हैं और भी वजे वहशत की
इंसान को रखती दुखियारा
हन बेकल बेकल रहता है
वो प्रीत में जिस ने दिल हरा
पर शाम से लेकर सुबो तलाक़
यून कौन फिरे है आवारा
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
गर इश्क़ किया है तब क्या है
क्यों शाद नहीं आबाद नहीं
जो जाम लिए बिन चल ना सके
ये ऐसी भी उस्ताद नहीं
फाइंड मोरे लिरिक्स अट ववव.स्वीत्सल्यरीक्स.कॉम
ये बात तो तुम भी मानो गे
वो कैस नहीं फरहाद नहीं
क्या हिजर का दारू मुश्किल है
क्या फास्ल मुस्ते याद नहीं
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
जो हम से कहो हम करते हैं
क्या इंशा को समझना है
उस लड़की से भी कहलेंगे
गो अब कुच्छ और ज़माना है
या छ्चोड़ें या तकमील करें
ये इश्क़ है या अफ़साना है
ये कैसा गोरख धनदा है
ये कैसा तानाबाना है
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशजी का नाम ना लो
क्या इंशजी सौदाई हैं
ये बातें झुटि बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
ये बातें, ये बातें
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फनकार/मौसीकार : गुलाम अली
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7/04/2011 01:16:00 PM
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दिल की बात लबों तक लाकर अब तक दुख सहते हैं
हम ने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं
बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदली
लेकिन इन प्यासी आँखों में अब तक आसू बहते हैं
एक ह्यूम आवारा केहेना कोई बड़ा इल्ज़ाम नही
दुनिया वाले दिल वालों को और बहूत कुछ कहते हैं
जिसकी खतीर शहर भी चोरदा जिसके लिए बदनाम हुए
आज वोही हुंसे बेगाने बेगाने से रहते हैं
वो जो अभी रहगीज़ार से चक-ए-ग़रेबान गुज़रा था
उस आवारा दीवाने को "जालीब जालीब कहते हैं
हम ने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं
बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदली
लेकिन इन प्यासी आँखों में अब तक आसू बहते हैं
एक ह्यूम आवारा केहेना कोई बड़ा इल्ज़ाम नही
दुनिया वाले दिल वालों को और बहूत कुछ कहते हैं
जिसकी खतीर शहर भी चोरदा जिसके लिए बदनाम हुए
आज वोही हुंसे बेगाने बेगाने से रहते हैं
वो जो अभी रहगीज़ार से चक-ए-ग़रेबान गुज़रा था
उस आवारा दीवाने को "जालीब जालीब कहते हैं
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30.6.11
6/30/2011 01:27:00 PM
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28.6.11
6/28/2011 04:43:00 PM
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तेरी बात ही सुनाने आये, दोस्त भी दिल ही दुखाने आये
फूल खिलते हैं तो हम सोचते हैं तेरे आने का ज़माने आये
शायद मुझे निकाल के पछता रहे हो आप
महफ़िल में इस ख़याल से फिल आ गया हूँ मैं
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई
हमने बचाई लाख मगर फिर उधर गई
उनकी नज़र में कोई तो जादू ज़ुरूर है
जिस पर पड़ी, उसी के जिगर तक उतर गई
उस बेवफा की आँख से आंसू झलक पड़े
हसरत भारी निगाह बड़ा काम कर गई
उनके जमाल-इ-रुख पे उन्ही का जमाल था
वोह चल दिए तो रौनक-इ-शाम-ओ-सहर गई
उनको खबर करो के है बिस्मिल करीब-इ-मर्ग
वोह आयेंगे ज़ुरूर जो उन तक खबर गई
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शायर : आगा बिसमिल
मौसीकार और फनकार : गुलाम अली
फूल खिलते हैं तो हम सोचते हैं तेरे आने का ज़माने आये
शायद मुझे निकाल के पछता रहे हो आप
महफ़िल में इस ख़याल से फिल आ गया हूँ मैं
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई
हमने बचाई लाख मगर फिर उधर गई
उनकी नज़र में कोई तो जादू ज़ुरूर है
जिस पर पड़ी, उसी के जिगर तक उतर गई
उस बेवफा की आँख से आंसू झलक पड़े
हसरत भारी निगाह बड़ा काम कर गई
उनके जमाल-इ-रुख पे उन्ही का जमाल था
वोह चल दिए तो रौनक-इ-शाम-ओ-सहर गई
उनको खबर करो के है बिस्मिल करीब-इ-मर्ग
वोह आयेंगे ज़ुरूर जो उन तक खबर गई
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शायर : आगा बिसमिल
मौसीकार और फनकार : गुलाम अली
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16.6.11
6/16/2011 04:27:00 PM

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ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं
क्यूँ शिकन डालते हो माथे पर
भूल कर आ गए हम जाते हैं
कश्तियाँ यूँ भी डूब जाती हैं
नाख़ुदा किसलिये डराते हैं
इक हसीं आँख के इशारे पर
क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं
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फनकार और मौसिकार : मेहन्दी हसन
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15.6.11
6/15/2011 07:01:00 AM
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दिल में एक ल़हेर सी उठी हैं अभी
कोई ताज़ा हवा चली हैं अभी
शोर बरपा है खाना ए दिल में
कोई दीवार सी गिरी हैं अभी
कुच्छ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी
और ये चोठ भी नयी हैं अभी
भारी दुनियाँ में जी नहीं लगता
जाने किस चीज़ की कमी हैं अभी
तू शरीक-ए-सुख्हन नहीं हैं तो क्या
हम सुख्हन तेरी खामोशी हैं अभी
याद के बेनिशान जज़ीरों से
तेरी आवाज़ आ रही हैं अभी
शहेर के बेचराग़ गलियों में
ज़िंदगी तुझ को ढ्नडती हैं अभी
सो गये लोग उस हवेली के
एक खिडकी मगर खुली है अभी
तुम तो यारो अभी से उठ बैठे
शहर मैं रात जागती है अभी
वक़्त अच्छा भीइ आएगा 'नसीर'
गम ना कर ज़िंदगीइ पा.डी है अभी
______________
शायर : नसीर काज़मी
फनकार/मौसीकार : गुलाम अली
कोई ताज़ा हवा चली हैं अभी
शोर बरपा है खाना ए दिल में
कोई दीवार सी गिरी हैं अभी
कुच्छ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी
और ये चोठ भी नयी हैं अभी
भारी दुनियाँ में जी नहीं लगता
जाने किस चीज़ की कमी हैं अभी
तू शरीक-ए-सुख्हन नहीं हैं तो क्या
हम सुख्हन तेरी खामोशी हैं अभी
याद के बेनिशान जज़ीरों से
तेरी आवाज़ आ रही हैं अभी
शहेर के बेचराग़ गलियों में
ज़िंदगी तुझ को ढ्नडती हैं अभी
सो गये लोग उस हवेली के
एक खिडकी मगर खुली है अभी
तुम तो यारो अभी से उठ बैठे
शहर मैं रात जागती है अभी
वक़्त अच्छा भीइ आएगा 'नसीर'
गम ना कर ज़िंदगीइ पा.डी है अभी
______________
शायर : नसीर काज़मी
फनकार/मौसीकार : गुलाम अली
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Jagjit Singh
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11.6.11
6/11/2011 06:47:00 PM
________________
मिलकर जुदा हुए तो ना सोया करेंगे हम
एक दूसरे के याद में रोया करेंगे हम
आँसू चालक चालक के सताएँगे रात भर
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम
जब दूरियों की याद दिलों को जलाएगी
जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम
गर दे गया दगा हमें तूफान भी 'क़तील'
साहिल पे कश्टियों को दुबोया करेंगे हम
___________
फनकार : जगजीत सिंग और चित्रा सिंग
एक दूसरे के याद में रोया करेंगे हम
आँसू चालक चालक के सताएँगे रात भर
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम
जब दूरियों की याद दिलों को जलाएगी
जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम
गर दे गया दगा हमें तूफान भी 'क़तील'
साहिल पे कश्टियों को दुबोया करेंगे हम
___________
फनकार : जगजीत सिंग और चित्रा सिंग
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