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A+S ,
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10/05/2010 09:58:00 PM
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शाम को सूभ-ए-चमन याद आई
شام کو سوبھ - ئی - چمن یاد آئی
किस की खुश्बू-ए-बदन याद आई
کس کی کھشبو - ئی - بدن یاد آئی
चाँद जब दूउर उफ़ाक़ पर डूबा
چاند جب دواُر اُفاک پر ڈوب
तेरे लहजे की थकान याद आई
تیرےلہجےکی تھکان یاد آئی
याद आए तेरे पैकर के खुतूवत
یاد آئی تیرےپیکر کےکھتووت
अपनी कोताही-ए-फान्न याद आई
اَپنی کوتاہی - ئی - پھانن یاد آئی
जब ख़यालों में कोई मोर आया
جب خیالوںمیں کوئی مور آیا
तेरे गेसू की शिकर्ण याद आई
تیرےگیسو کی شکرن یاد آئی
दिन शुआओं से उलझते गुज़रा
دن شآاوںسےاُلجھتےگجرا
रात आई तो किरण याद आई
رات آئی تو کرن یاد آئی
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फ़नकार : गुलाम अली
शायर : एहमद नदीम काज़मी
شام کو سوبھ - ئی - چمن یاد آئی
किस की खुश्बू-ए-बदन याद आई
کس کی کھشبو - ئی - بدن یاد آئی
चाँद जब दूउर उफ़ाक़ पर डूबा
چاند جب دواُر اُفاک پر ڈوب
तेरे लहजे की थकान याद आई
تیرےلہجےکی تھکان یاد آئی
याद आए तेरे पैकर के खुतूवत
یاد آئی تیرےپیکر کےکھتووت
अपनी कोताही-ए-फान्न याद आई
اَپنی کوتاہی - ئی - پھانن یاد آئی
जब ख़यालों में कोई मोर आया
جب خیالوںمیں کوئی مور آیا
तेरे गेसू की शिकर्ण याद आई
تیرےگیسو کی شکرن یاد آئی
दिन शुआओं से उलझते गुज़रा
دن شآاوںسےاُلجھتےگجرا
रात आई तो किरण याद आई
رات آئی تو کرن یاد آئی
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फ़नकार : गुलाम अली
शायर : एहमद नदीम काज़मी
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A+S ,
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10/05/2010 09:50:00 PM
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...a rich combinatorial result of and by Gulzar's direction, music composed by Hridaynaath Mangeshkar and the 'evergreen' sound of Asha Bhosle along with Pt.Satyasheel Deshpande !!!
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A+S ,
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10/05/2010 09:41:00 PM
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2 great legends of entire blends of every 'frames' of Indian 'nashaa' of rich music that has, will and always remain tinkling on our minds always, Asha Bhosle and Khaiyyam
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G.D.Madgulkar
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Sudhir Phadke
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पराधीन आहे जगती पुत्र मानवाचा
,
10/05/2010 05:57:00 PM
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गीत रामायण
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पाराधीन आहे जगती पुत्र मानवाचा
गीत: ग.दी.मा
गायक व संगीत: सुधीर फडके
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पाराधीन आहे जगती पुत्र मानवाचा
गीत: ग.दी.मा
गायक व संगीत: सुधीर फडके
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एनिमेटेड संस्करण
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||पाराधीन आहे जगती पुत्र मानवाचा||
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"गीत रामायण"
||गीतकार||
ग.दि.मा
||संगीतकार व गायक||
सुधीर फडके
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||पाराधीन आहे जगती पुत्र मानवाचा||
------------------
"गीत रामायण"
||गीतकार||
ग.दि.मा
||संगीतकार व गायक||
सुधीर फडके
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A+S ,
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10/05/2010 05:41:00 PM
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मिराज़-ए-ग़ज़ल
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|composer|| Gulaam Ali|
|Singers|| Asha Bhosle & Gulaam Ali|
|Photo-shoot by|| Santosh Jadhav|
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|composer|| Gulaam Ali|
|Singers|| Asha Bhosle & Gulaam Ali|
|Photo-shoot by|| Santosh Jadhav|
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Naina Tose Laage (Remix)
The mesmerizing voice of
ASHA BHOSLE
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10/05/2010 05:30:00 PM
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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आए
आ फिर से मुझे छ्चोड़ के जाने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
पहले से मारसीं ना सही फिर भी कभी तो
रस्मो रहे दुनिया ही निभाने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझसे खफा है तो ज़माने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
कुछ तो मेरे पिंडयर-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मानने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
इक उम्र से हून लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
आए राहत-ए-जान मुझको रुलाने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
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Fankaar: Runa Laila
आ फिर से मुझे छ्चोड़ के जाने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
पहले से मारसीं ना सही फिर भी कभी तो
रस्मो रहे दुनिया ही निभाने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझसे खफा है तो ज़माने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
कुछ तो मेरे पिंडयर-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मानने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
इक उम्र से हून लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
आए राहत-ए-जान मुझको रुलाने के लिए आ
रंजिश ही सही…………
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Fankaar: Runa Laila
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A+S ,
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10/05/2010 05:27:00 PM
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Raag Jogiya rendered by Ustaad Nazaakat Ali Khan & Ustaad Salaamat Ali Khan
in a thumri "aan milo ik baar sajanwa"
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A+S ,
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10/05/2010 04:14:00 PM
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Since my childhood, with and around my environment and 'mental' growth, music "made, played as well grew" parallel around me. During the end of '70s my father had purchased a LP (Long Play) with the face and name of a budding hundustani vocal artist at that time called Prabha Atre. Personally I was quite childish. Yet, after my first hearing I was feeling excited though not particularly in its technical aspects. A few days later I hear it again. I was getting a simple yet 'different' feeling. Calm, relaxed and sense of mixed combination of spiritual as well happiness. As I grew, I used to get the opportunity for various festivals and concerts and eagerly waiting to hear more and particularly for that similar raag. That was the time I came to know that it is a particular rendition raag called Maru Bihaag. Years later last year during the end of 2009 I was in Music Academy in Chennai for the live concert of Pandit Channulal Mishra. My past memories were 're-enlightened'. So here is a creative compilation the raag Maru Bihaad rendered by Pandit Channulal Mishra in a drut teentaal to share with friends, old and new.
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The raag has been rendered in a drut ektaal.
I look forward for one and all to hear and enjoy the rich treasure of hindustaani classical music.
I look forward for one and all to hear and enjoy the rich treasure of hindustaani classical music.
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Rendered by Ustaad Rashid Khan in drut Teentaal.
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Raag Maaru Bihaag rendered by Dr.Prabhaa Atre in drut teentaal.
A romantic evening raag with its much-loved Maaru Bihaag is of fairly recent vintage. The Maaru Bihaag in currency is widely acknowledged to be a product of Atrauli-Jaipur founder Alladiya Khan's prodigious imagination. Over the years and in the course of its journey across regions, the raag has acquired quaint touches and flavors reflecting the idiosyncrasies of some of the more creative minds.
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A+S ,
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10/05/2010 02:57:00 PM
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माला हों या मायाजाल, ममता हो या मेह्जबीन का आँचल...
वोह जो हम में तुम में करार था
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वो ही यँनी वाडा निबाह का
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वो नये गीले वो शिकायतें
वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना
तुम्हे याद हो के ना याद हो
कभी हम मे तूमे मे भी चाह थी
कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम से थे आशना
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वोह जो हम में तुम में करार था
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वो ही यँनी वाडा निबाह का
तुम्हे याद हो के ना याद हो
वो नये गीले वो शिकायतें
वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना
तुम्हे याद हो के ना याद हो
कभी हम मे तूमे मे भी चाह थी
कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम से थे आशना
तुम्हे याद हो के ना याद हो
of
Gwaalher Gharanaa
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विभूषि श्रीमती मालिनी राजुरकर (१९४१ में पैदा हुई) एक ग्वालियर घराने की हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक संतोष व्यक्त किया. वह राजस्थान के राज्य में भारत में वृद्धि हुई. , उसके भविष्य के पति वसंतराव के एक चाचा गोविंद राजुरकर, शुरू में उसे संगीत सिखाया. वह तो आगे वसंतराव मालिनी. भारत में प्रमुख संगीत उत्सव, गुणिदाससम्मेलन (मुंबई), तानसेन समारोह (ग्वालियर) में शामिल किया गया है के तहत संगीत सीखा, सवाई गंधर्व समारोह (पुणे), शंकर लाल समारोह (दिल्ली), श्रीमती केसरबाई केरकर समारोह.
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| 01 Bhopali.mp3 |
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| 02 Shankara.mp3 |
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| 03 Sohoni.mp3 |
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| 04 Chhayanat.mp3 |
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| 05 Hameer.mp3 |
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| 06 Adana.mp3 |
~
| 07 Kaushik Ranjani... |
~
| 08 Tappa Khamaaj.m... |
~
| 09 Salagwarali.mp3 |
~
| 10 Bibhas.mp3 |
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| 11 Bhairavi Tappa ... |
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01. Raag Lalit Bhatiyar
02. Raag Lalit
03. Raag Miyan Ki Todi
04. Raag Komal Rishabh Asavari Todi
05. Raag Gaud Sarang
06. Raag Sur Malhaar
07. Raag Multaani
08. Raag Maarwaa
09. Raag Maarwaa
10. Raag Pooriyaa
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दुख में सुमिरन सब करे
ऐसी वानी बोलिये...
बड़ा हुआ तो क्या हुआ
बोले बोल विचारी के...
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उस्ताद रशीद ख़ान
ऐसी वानी बोलिये...
बड़ा हुआ तो क्या हुआ
बोले बोल विचारी के...
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उस्ताद रशीद ख़ान
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10/04/2010 09:53:00 AM
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क्यों न भये बंसी कुल सजनी,
अधर पीबत घनघोर
क्यों न भये गुंजा बनवेली,
रहत स्याम जु की ओर
या सखी झूलत राधामोहन
...झूलत ब्रिज गोपाल
पलना झूले नंदलाल
अधर पीबत घनघोर
क्यों न भये गुंजा बनवेली,
रहत स्याम जु की ओर
या सखी झूलत राधामोहन
...झूलत ब्रिज गोपाल
पलना झूले नंदलाल
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Goa
,
Konkani Bhaavgeet
,
Konkani Movie Song
,
23.9.10
9/23/2010 10:07:00 AM
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Raag Madhukauns, toward the late evening "preher" in vilambit followed by drut teenlaal rendered by Smt. Arti Anklikar Tikekar. A bhajan follows sung by Smt. Laxmi Shankar
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This was the movie Albela that I had seen-watched almost 35 years back in Panaji, at National Theater. Of 'course, the movie in every perspective is wonderful. Amongst all, one song has well 'impacted' on my mind.
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धीरे से आजा री अँखियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
छ्होटे से नैनन की बगियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
ओ ...
लेकर सुहाने सपनों की कलियाँ, सपनों की कलियाँ
आके बसा दे पलकों की गलियाँ, पलकों की गलियाँ
पलकों की छ्होटी सी गलियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
धीरे से ...
ओ ...
तारों से च्छूप कर तारों से चोरी, तारों से चोरी
देती है रजनी चंदा को लॉरी, चंदा को लॉरी
हँसता है चंदा भी निंदियन में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
धीरे से ...
____________
धीरे से आजा री अँखियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
छ्होटे से नैनन की बगियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
ओ ...
आँखें तो सब की हैं इक जैसी
जैसी अमीरों की, ग़रीबों की वैसी
पलकों की सूनी सी गलियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
धीरे से ...
ओ ...
जागती है अँखियाँ सोती है क़िस्मत, सोती है क़िस्मत
दुश्मन ग़रीबों की होती है क़िस्मत, होती है क़िस्मत
दम भर ग़रीबों की कुटियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
____________
अलबेला
संगीत : सी. रामचंद्र
स्वर : लता मंगेशकर और रामचंद्र चिताळकर
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
छ्होटे से नैनन की बगियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
ओ ...
लेकर सुहाने सपनों की कलियाँ, सपनों की कलियाँ
आके बसा दे पलकों की गलियाँ, पलकों की गलियाँ
पलकों की छ्होटी सी गलियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
धीरे से ...
ओ ...
तारों से च्छूप कर तारों से चोरी, तारों से चोरी
देती है रजनी चंदा को लॉरी, चंदा को लॉरी
हँसता है चंदा भी निंदियन में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
धीरे से ...
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धीरे से आजा री अँखियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
छ्होटे से नैनन की बगियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
ओ ...
आँखें तो सब की हैं इक जैसी
जैसी अमीरों की, ग़रीबों की वैसी
पलकों की सूनी सी गलियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
धीरे से ...
ओ ...
जागती है अँखियाँ सोती है क़िस्मत, सोती है क़िस्मत
दुश्मन ग़रीबों की होती है क़िस्मत, होती है क़िस्मत
दम भर ग़रीबों की कुटियाँ में
निंदिया आजा री आजा, धीरे से आजा
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अलबेला
संगीत : सी. रामचंद्र
स्वर : लता मंगेशकर और रामचंद्र चिताळकर
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'Chhayanat' is a beautiful raag sung during the late evenings. It is also mentioned in 'Sangeet Parijaat' one of the early Sanskrit texts, though the scale at that time was different. Starting from middle 'C', it had a minor 3rd and a minor 7th notes, whereas today the north Indian music has the same tempered scale as in European music.
The beautiful and slightly unusual composition is accredited to Ustaad Enayat Hussain Khan, the founder of the 'Sahaswan / Rampur gharaanaa, to which Ustaad Rashid Khan belongs. This raag has close similar with the Raag Jay Jaywanti.
The beautiful and slightly unusual composition is accredited to Ustaad Enayat Hussain Khan, the founder of the 'Sahaswan / Rampur gharaanaa, to which Ustaad Rashid Khan belongs. This raag has close similar with the Raag Jay Jaywanti.
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Kaushiki Chakrabarty
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Mishra Charukeshi Thumri
,
Raag
,
11.9.10
9/11/2010 05:47:00 PM
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Childhood Memories
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9/11/2010 05:41:00 PM
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लहानपण देगा देवा । मुंगी साखरेचा रवा ॥१॥
ऐरावत रत्न थोर । त्यासी अंकुशाचा मार ॥२॥
जया अंगी मोठेपण । तया यातना कठीण ॥३॥
तुका म्हणे बरवे जाण । व्हावे लहानाहून लहान ॥४॥
महापूरे झाडे जाती । तेथे लव्हाळ वाचती ॥५॥
ऐरावत रत्न थोर । त्यासी अंकुशाचा मार ॥२॥
जया अंगी मोठेपण । तया यातना कठीण ॥३॥
तुका म्हणे बरवे जाण । व्हावे लहानाहून लहान ॥४॥
महापूरे झाडे जाती । तेथे लव्हाळ वाचती ॥५॥
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हो बहुत रात हुई..
थक गया हूं, मुझे सोने दो
हो बहुत रात हुई
चांद से कह दो उतर जाये
बहुत बात हुई -२
थक गया हूं....रात हुई
आशियां के लिये चार तिनके भी थे
आसरे रात के और दिन के भी थे
ढूंढते थे जिसे, वो ज़रा सी ज़मीं
आसमां के तले खो गयी है कहीं
धूप से कह दो उतर जाये, बहुत बात हुई
मैं थक....रात हुई
[ओ मलैय्या, चलो धीरे धीरे (पंचम की आवाज़ में)]
याद आता नहीं अब कोई नाम से
सब घरों के दिये बुझ गये शाम से
वक़्त से कह दो गुज़र जाये, बहुत बात हुई
मैं थक....रात हुई
ज़िन्दगी के सभी रास्ते सर्द हैं
अजनबी रात के अजनबी दर्द हैं
याद से कह दो गुज़र जाये, बहुत बात हुई
मैं थक गया हूं, मुझे सोने दो, बहुत रात हुई
[ओ मलैय्या, चलो धीरे धीरे]
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गीत : थक गया हूं, बहुत रात हुई
फ़िल्म : मुसफ़िर (१९८४)
संगीतकार : आर.डी. बर्मन
गीतकार : गुलज़ार
गायक : किशोर कुमार, आर.डी. बर्मन
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A Rare Combination
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Kishore Kumar
,
Lata Mangeshkar
,
9/11/2010 04:52:00 PM
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Once again a "commonly unheard" song sung by Kishore Kumar and my special 'naman' to one of the unparalleled legend Kishore Da
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8/19/2010 03:39:00 PM
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कुछ दूर हमारे साथ चलो हम दिल की कहानी कह देंगे
समझे ना जिसे तुम आँखों से वो बात ज़बानी कह देंगे
फूलों की तरह जब होंठों पर इक शोक तबस्सुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में इक बात पुरानी कह देंगे
इज़हार-ए-वफ़ा तुम क्या समझो इक़रार-ए-वफ़ा तुम क्या जानो
हम ज़िक्र करेंगे गैरों का और अपनी कहानी कह देंगे
मौसम तो बड़ा ही ज़ालिम है तूफान उठाता रहता है
कुछ लोग मगर इस हलचल को बदमस्त जवानी कह देंगे
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समझे ना जिसे तुम आँखों से वो बात ज़बानी कह देंगे
फूलों की तरह जब होंठों पर इक शोक तबस्सुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में इक बात पुरानी कह देंगे
इज़हार-ए-वफ़ा तुम क्या समझो इक़रार-ए-वफ़ा तुम क्या जानो
हम ज़िक्र करेंगे गैरों का और अपनी कहानी कह देंगे
मौसम तो बड़ा ही ज़ालिम है तूफान उठाता रहता है
कुछ लोग मगर इस हलचल को बदमस्त जवानी कह देंगे
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8/18/2010 07:01:00 PM
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दु:ख कोणांक चुकना
संसाराची ताप नासतना
पूर्वपुण्य पिकना
हरिश्चंद्र भवजाळी पडलो
परोपरीन वनवन विडविडलो
बायल, पूत, धन, राज्य व्हगडलो
लागुन ह्या मायणा
जल्ले व्हेल्ले घर आसुन उंचेले
शितेक पळेया कितले भोगले
घोव देव आसून हुल्पली
जावन भयो दैना
देवपुता पाडवा अतिरथी
वश जाल्लो साक्षात श्रिपती
साह्य आसुन संसारसारथी
पडले सामके उदणा
व्हडाव्हडची ही असली गति
कुळक्षयय खर भोगालो श्रीपती
पळवन पुण हे मनिस अल्पमती
रतिभरय शिकता
भोग जिवा सन्सारयातना
असलो योग परतून येवचो ना
जळ् ळ्याबगर हे शास्त्र उमजना
तातली जोत जिभना
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गीत : बाकिबाब बोरकार
संगीत : पं. जितेंद्र अभिषेकी
स्वर : अजीत कडकडे
संसाराची ताप नासतना
पूर्वपुण्य पिकना
हरिश्चंद्र भवजाळी पडलो
परोपरीन वनवन विडविडलो
बायल, पूत, धन, राज्य व्हगडलो
लागुन ह्या मायणा
जल्ले व्हेल्ले घर आसुन उंचेले
शितेक पळेया कितले भोगले
घोव देव आसून हुल्पली
जावन भयो दैना
देवपुता पाडवा अतिरथी
वश जाल्लो साक्षात श्रिपती
साह्य आसुन संसारसारथी
पडले सामके उदणा
व्हडाव्हडची ही असली गति
कुळक्षयय खर भोगालो श्रीपती
पळवन पुण हे मनिस अल्पमती
रतिभरय शिकता
भोग जिवा सन्सारयातना
असलो योग परतून येवचो ना
जळ् ळ्याबगर हे शास्त्र उमजना
तातली जोत जिभना
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गीत : बाकिबाब बोरकार
संगीत : पं. जितेंद्र अभिषेकी
स्वर : अजीत कडकडे
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Ajit Kadkade
,
Baakibaab
,
Borkar
,
Jitendra Abhisheki
,
8/18/2010 05:19:00 PM
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त्या दिसा वडा कडेन गडद तिनसना
मंद मंद वाजत आयली तुजी गो पांयजणा
मौन पडले सगल्या रानां
शिरशिरून थांबलिं पानां
कंवळी जाग आयली तणा झेमता झेमतना
पैसुल्यान वाजलि घांट
दाटलो न्हयेचो कंठकांठ
सांवळ्यानी घमघमाट सुटलो त्या खिणा
फुललो वैर चंद्र ज्योती
रंध्रांनी लागल्यो वाती
नवलांची जावंक लागलीं शकून लक्षणा
गळ्यान सुखां, दोळ्यान दुकां
लकलकली जावन थिकां
नकळटना एक जालीं आमी दोगाय जाणा
वडफळांच्या अक्षतांत
कितलो वेळ न्हायत न्हायत
हुपले कितले चंद्रलोक इंद्रनंदना
तांतले काय नुल्ले आज
सगले जिणेक आयल्या सांज
तरीय अकस्मात तुजी वाजली पांयजणा
कानसुलांनी भोंवता भोंवर
आन्गार दाट फुलंति चंवर
पडटी केन्ना सपनां तींच घडटी जागरणा
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मंद मंद वाजत आयली तुजी गो पांयजणा
मौन पडले सगल्या रानां
शिरशिरून थांबलिं पानां
कंवळी जाग आयली तणा झेमता झेमतना
पैसुल्यान वाजलि घांट
दाटलो न्हयेचो कंठकांठ
सांवळ्यानी घमघमाट सुटलो त्या खिणा
फुललो वैर चंद्र ज्योती
रंध्रांनी लागल्यो वाती
नवलांची जावंक लागलीं शकून लक्षणा
गळ्यान सुखां, दोळ्यान दुकां
लकलकली जावन थिकां
नकळटना एक जालीं आमी दोगाय जाणा
वडफळांच्या अक्षतांत
कितलो वेळ न्हायत न्हायत
हुपले कितले चंद्रलोक इंद्रनंदना
तांतले काय नुल्ले आज
सगले जिणेक आयल्या सांज
तरीय अकस्मात तुजी वाजली पांयजणा
कानसुलांनी भोंवता भोंवर
आन्गार दाट फुलंति चंवर
पडटी केन्ना सपनां तींच घडटी जागरणा
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