Walk through this world with me...


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Walk Through This World With Me
Go Where I Go
Share All My Dreams With Me
I Need You So...

In Light We Search
And Some Others Find
I Lived For You My Love
For Long Long Time
And Now Where I Found You
Live For As Since As I See
Come Take My Hand
And Walk Through This World With Me

Walk Through This World With Me
Go Where I Go
Share All My Dreams With Me
I Need You So...
And Now That I Found You......
Live For As Since As I See
Come Take My Hand
And Walk Through This World With Me

Come Take My Hand
And Walk Through This World With Me


अपनी तस्वीर

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अपनी तस्वीर को आँखों से लगता क्या है,
اَپنی تصویر کو آنکھوںسےلگتا کیا ہے
एक नज़र मेरी तरफ देख तेरा जाता क्या है,
ئیک نظر میری طرف دیکھ تیرا جاتا کیا ہے

मेरी रुसवाई में तू भी है बराबर का शारीक़,
میری رسوائی میں تو بھی ہے برابر کا شاریک
मेरे किससे मेरे यारों को सुनता क्या है,
میرےکسسےمیرےیاروںکو سنتا کیا ہے

पास रहकर भी ना पहचान सके तू मुझको,
پاس رہکر بھی نا پہچان سکےتو مجھکو
डोर रह कर अब हाथ मिलता क्या है,
ڈور رہ کر اب ھاتھ ملتا کیا ہے

उम्र भर अपने गिरेबान्न से उलझनेवाले,
اُمر بھر اپنے گریبانن سےاُلجھنیوالی
तू मुझे मेरे साए से दरता क्या है,
تو مجھےمیرےسائی سےدرتا کیا ہے

मैं तेरा कुछ भी नहीं हून मगर इतना तो बता,
میںتیرا کچھ بھی نہیںھون مگراتنا تو بتا
देख कर मुझको तेरे ज़हेन में आता क्या है
دکھ کر مجھکو تیرےجہین میں آتا کیا ہے
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मौसीकार : गुलाम अली
مؤسیکار : گلام اَلی
फनकार : गुलाम अली
پھنکار : گلام اَلی

मी ओळखून आहे

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लाजून हासणे अन हासून ते पहाणे
मी ओळखून आहे, सारे तुझे बहाणे

डोळ्यास पापण्यांचा का सांग भार व्हावा ?
मिटताच पापण्या अन का चंद्र हि दिसावा ?
हे प्रश्न जीवघेणे हरती जिथे शहाणे

हाती धनुष्य ज्यांच्या, त्याला कसे कळावे
हृदयात बाण ज्याच्या, त्यालाच दु:ख ठावे
तिरपा कटाक्ष भोळा, आम्ही इथें दिवाणे

जाता समोरुनी तू, उगवे टपोर तारा
देशातूनी फुलांच्या आणि सुगंध वारा
रात्रीस चांदण्यांचे, सुचते सुरेल गाणे
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गीत : मंगेश पाडगांवकर
संगीत : श्रीनिवास खळे
स्वर : पंडित हृदयनाथ मंगेशकर

रंजिश ही सही

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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
رنجش ھی صیح دل ھی دکھانےکےلئے آ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
آ پھر سےمجھےچھوڑ کےجانےکےلئے آ


पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो
پہلےسےمراسم نہ صیح پھر بھی کبھی تو
रस्मो रहे दुनिया ही निभाने के लिए आ
رسمو رہےدنیا ھی نبھانےکےلئے آ


किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
کس کس کو بتائیںگےجدائی کا سبب ھم
तू मुझसे खफा है तो ज़माने के लिए आ
تو مجھسےکھپھا ہے تو زمانےکےلئے آ


कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
کچھ تو میرےپندار - ئی - موہببت کا بھرم رکھ
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ
تو بھی تو کبھی مجھکو منانےکےلئے آ


इक उम्र से हूँ लज्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
ئک عمر سےھوںلججت - ئی - گریا سےبھی مہروم
ए राहत-इ-जान मुझको रुलाने के लिए आ
ئی راہت -ا - جان مجھکو رلانےکےلئے آ
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शायर : एहमद फ़राज़
شایر : ئیہمد فراج
मौसीकार : मेहदी हस्सन
مؤسیکار : میہدی ھسسن
फनकार : मेहदी हस्सन
پھنکار : میہدی ھسسن

त्या फुलांच्या गंधकोषी

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त्या फुलांच्या गंधकोषी, सांग तू आहेस का ?
त्या प्रकाशी तारकांच्या, ओतिसी तू तेज का ?
त्या नभांच्या नीलरंगी होऊनी आहेस का ?
गात वायुच्या स्वरांनी, सांग तू आहेस का ?

मानवाच्या अंतराचा प्राण तू आहेस का ?
वादळाच्या सागराचे घोर ते तू रूप का ?
जीवनी या वर्षणारा तू कृपेचा मेघ का ?
आसमंती नाचणारी, तू विजेची रेघ का ?

जीवनी संजीवनी तू, माऊलीचे दूध का ?
कष्टणार्या बांधवांच्या रंगसी नेत्रात का ?
मूर्त तू मानव्य का रे, बालकांचे हास्य का ?
या इथें अन त्या तिथे रे, साग तू आहेस का ?
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गीत : सूर्यकांत खांडेकर
स्वर / संगीत : पंडित ह्रिदयनाथ मंगेशकर

काश ऐसा कोई मंजर होता

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काश ऐसा कोई मंजर होता
मेरे कांधे पे तेरा सर होता...||धृ||

जमा करता जो मैन आए हुए संग
सर छुपाने के लिए घर होता
मेरे कांधे पे तेरा सर होता
काश ऐसा कोई मंजर होता... ||१||

इस पलंगदी पे बहुत तन्हा हुं
काश मै सब के बराबर होता
मेरे कांधे पे तेरा सर होता
काश ऐसा कोई मंजर होता.... ||२||

उसने उलझा दिया दुनिया मे मुझे
वर्ना एक और कलंदर होता
मेरे कांधे पे तेरा सर होता
काश ऐसा कोई मंजर होता.... ||३||
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शायर : ताहिर फ़राज़
मौसिकार : हरिहरन
फनकार : हरिहरन

मैं आवारा...

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आज भी हैं मेरे कदमोन के निशान आवारा
तेरी गालीयोन मे भटकते थे जहां आवारा
आवारा.... आवारा ....आवारा ....आवारा ....

तुझ से क्या बीछडे तो
ये हो गई अपनी हालत
जैसे हो जाए मे हवओन मे धुवां आवरा
तेरी गालीयोन मे भटके थे जहान आवारा
आज भी हैं मेरे कदमोन के निशान आवारा !! १ C

मेरे शेरोन की थी पहचान उसी के दम से
ऊसको खोकर हुवे बेनामो निशान आवरा
तेरी गालीयोन मी भटकते थे जहान
तेरी गालीयोन मे भटके थे जहान आवारा
आज भी हैं मेरे कदमोन के निशान आवारा !! २ !!

जिसको भी चाहा उसे टुटके चाहा राशीद
कम मिलेंगे तुम्हे हम जैसे यहाँ आवारा
तेरी गालीयोन मी भटकते थे जहान
तेरी गालीयोन मे भटके थे जहान आवारा
आज भी हैं मेरे कदमोन के निशान आवारा !! ३ !!
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मौसिकार : हरिहरन
फनकार : हरिहरन

धुंद मंद ही अशीच

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धुंद मंद ही अशीच सांज उतरली
गगनातुनी येता सख्या
तुझीया प्रीतीची मधुर फुले ही !! धृ !!

रजनी चे ही मधुर गीत
सूर उमलली
गगनी नील हरित वेल कुंज बहरली
हृदयातूनी फुलती किती
हळव्या प्रीतीची मृदुल दले ही !! १ !!

चांदण्यात तरल तेज
स्वप्न वीखुरले
पान पान पवन मंद गंध परिमळे
तुझीया सवे सख्या असे
मजला नवतीचे सुख हे मिळे ही
धुंद मंद ही अशीच सांज उतरली !! २ !!
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गीत : शांताराम नंदगावकर
संगीत : अनिल - अरुण
स्वर : पद्मजा फेणाणी

क्षितिजी आले भरते ग

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गडद निळे गडद निळे जलद भरुनी आले
शितलतनु चपलचरण अनिलगण निघाले

क्षितिजी आले भरते ग
घनात कुंकुम खिरते ग

झाले अंबर
झुलले झुंबर
हवेत अत्तर तरते ग

लाजण झाली धरती ग
साजण काठावरती ग
ऊन्हात पान
मनात गान
ओलावुनी थरथरते ग

नाते अपुले न्हाते ग
होऊनी ॠतुरस गाते ग
तृणात मोती
जळात ज्योती
लावित आले परते ग

सरिवर सारी आल्या ग
सचैल गोपी न्हाल्या ग
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गीत : बाकीबाब बोरकर
संगीत : श्रीधर फडके
स्वर : पद्मजा फेणाणी-जोगळेकर

हम तेरे शेहेर में...

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हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तऱ्ह
सिर्फ एक बार मुलाकात का मौका दे दे !!धृ !!

मेरी मंजील हैं कहाण मेरा ठीन्काना हैं कहां
सुबह तक तुझसे बिछडकर मुझे जाना हैं कहां
सोचने के लिए एक रात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तऱ्ह !! १ !!

अपनी आंखो मे छुपकार रक्खे हैं जुगनू मैने
अपनी पलको पे सजा रक्खे हैं आंसू मैने
मेरी आंखो को बरसात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तऱ्ह !! २ !!

आज की रात मेरा दर्द मुहब्बत सून ले
कपकापते हुये होथोन की शिकायत सुन ले
आज इजहार-ए-खायालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तऱ्ह !! ३ !!

भुलना था तो ये इकरार किया ही क्यून था
बेवफा तुने मुझे प्यार किया ही क्यून था
सिर्फ दो चार सावालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तऱ्ह
सिर्फ एक बार मुलाकात का मौका दे दे !! ४ !!

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फनकार : गुलाम अली

लोग कहते हैं

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लोग कहते हैं अजनबी तुम हो
अजनबी मेरी ज़िंदगी तुम हो

दिल किसी और का न हो पाया
आरज़ू मेरी आज भी तुम हो

मुझको अपना शरीक-ए-ग़म कर लो
यूँ अकेले बहुत दुखी तुम हो

दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदें
किस ज़माने के आदमी तुम हो
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शायर : बशीर बद्र
मौसीकार : हरीहरन
फ़नकारां : आशा भोसले

क्या मिलेगा ?

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क्या मिलेगा किसिको किसीसे
आदमी हैं जुदा आदमी से

हमने सीखा अंधेरोमे जीना
आप घबरा गाएँ रोशनिसे

दिल मिलाओं तो मिलता हैं दिल भी
दिल को निसबत नही दिलगिसे

क्या खुशी हैं कभी उनसे पूछो
गम मिलाहे जिन्हे हर खुशिसे

दूरतक गर्ग हैं आसमाँ पर
कौन गुज़रा हमारे गालिसे
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शायर : सरदार अंजुम
फनकार : तलत अज़ीज़
संगीत : जगजीत सिंग

सर-ए-राह जुछ भी कहा नहीं

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सर-ए-राह जुछ भी कहा नहीं, कभी उसके घर में गया नहीं
سر - ئی - راہ جچھ بھی کہا نہیں , کبھی اُسکےگھر میں گیا نہین
मैं जनम जनमसे उसीका हूँ, उसे आज तक ये पता नहीं |
میںجنم جنمسےاُسیکا ھوں , اُسےآج تک یہ پتہ نہیں|


ये खुदा की देन अजीब हैं के उसी का नाम नसीब हैं,
یہ کھدا کی دین عجیب ہیں کےاُسی کا نام نسیب ہیں ,
जिसे तुने चाहा वो मिलगया जिसे मैंने चाहा मिला नहीं |
جسےتنےچاہا وہ ملگیا جسےمیںنے چاہا ملا نہیں|


उसे पाके नज़रों से चूमना की इबादतों में शुमार हैं,
اُسےپاکےنزروںسےچومنا کیابعدتوںمیں شمار ہیں ,
कोई फूल लाख करीब हो कभी मैंने उसको छुवा नहीं |
کوئی پھول لاکھ قریب ھو کبھی میںنے اُسکو چھوا نہیں|


इसी शेहेर में कई सालसे मेरे कुछ करीबी अज़ीज़ हैं,
اسی شیہیر میں کئی سالسےمیرےکچھ کریبی اَزیز ہیں ,
उन्नेह मेरी कोई खबर नहीं, मुझे उनका कोई पता नहीं |
اُننیہ میری کوئی خبر نہیں , مجھےاُنکا کوئی پتہ نہیں|
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शायर : बशीर बद्र
شایر : بشیر بدر
फनकार : तलत अज़ीज़
پھنکار : تلت اَجیج
संगीत : तलत अज़ीज़
سنگیت : تلت اَجیج

अब क्या ग़ज़ल सुनाऊं

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कैसे सुकून पाऊँ, तुझे देखने के बाद,
अब क्या ग़ज़ल सुनाऊं, तुझे देखने के बाद

आवाज़ दे रही है मेरी ज़िंदगी मुझे,
जाऊं मैं या ना जाऊं, तुझे देखने के बाद

क़ाबे का ऐहेतराम भी मेरी नज़र में हैं,
सर किस तरफ जुकाऊं, तुझे देखने के बाद

तेरी निगाह-ए-मस्त ने मखनूर कर दिया,
क्या मैकड़े को जाऊं, तुझे देखने के बाद

नज़रों मे ताब-ए-दीद ही बाकी नही रही,
किस से नज़र मिलऊं, तुझे देखने के बाद
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शायर : सईद शहीदी
फनकार : तलत अज़ीज़
संगीतकार : जगजीत सिंह

इतना तो हुवा ऎ दिल

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 शायर : सईद राही
फनकार : तलत अज़ीज़
संगीतकार : जगजीत सिंह

चाहेंगें तुझे पर...

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चाहेंगे तुझे पर कभी रुसवा ना करेंगे
सायें से भी अपने तेरा शिकवा न करेंगे

पूछेंगे हवओंसे घटाओंसे तेरा हाल
मिलने को तेरे वास्ते आया ना करेंगे

तु मिल भी गया राह में भूले से जो मुझ को
मीलने का दुबारा कभी वादा ना करेंगे

जिस नाम की ताजीम किया करते हैं परदे
उस नाम को दिवार पे लिक्का ना करेंगे
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फनकार : तलत अज़ीज़
संगीतकार : जगजीत सिंह

अपने दिल की बात

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चाँद निकला था, मगर रात न थी पहेले से
ये मुलाक़ात, मुलाक़ात न थी पहेले से
रंज कुच्छ कम तो हुआ आज तेरे मिलने से,
ये अलग बात के वो बात न थी पहली से

मेरे तो एक बात का इतना गिला हुआ
कुच्छ आप को भी याद है अपना कहा हुआ...

तेरे गले के हार से आए वफा की बू
फूलों में कोई दिल तो नही है बुंधा हुआ...

ऐचारा साज़ ये तो बता किसका क्या इलाज़
आंसू थमे तो दर्द जिगर में सिवा हुआ...

मधुफल में अपनी आंकसे आई सदा मुझे
मैं नक्ष-ऐ-पाईयार हूँ लेकिन मिटा हवा...
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फनकार : तलत अज़ीज़
संगीतकार :  जगजित सिंह

कशी तुझ समजावू सांग ?



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कशी तुझ समजावू सांग ?
का भामिनी उगिच राग ?

अस्याहून मधु रुसवा
हेमंती उष्ण हवा
संध्येचा साज नवा
हा का प्रणयानुराग ?

चाफेकळी केवी फुले
ओठ-कमल जेवी उले
भोवती मधुगंध पाले
का प्रसन्न वादन राग ?

वृत्तीचा होम अमुप
त्यात जाळू गे विकल्प
होवूनिया निर्विकल्प
अक्षय करू यज-याग

ओठांचे फेड बंध
गा इकडे मुक्तछंद
श्वासांचे करू प्रबंद
हृदयांचे मधु प्रयाग
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गीत : बाकीबाब बोरकर
स्वर / संगीत : पंडित जितेंद्र अभिषेकी

अंतरिचा बोल सखे

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केशी तुझीया...


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केशी तुझिया फुले उगवतील ओ ओ ,तुला कशाला वेणी ?
चांदण्यास शिणगार कशाला ?चांदण्यास शिणगार कशाला ?
बसशील तेथे लेणी !!
तुला कशाला वेणी ?
काळोखातही नीळ फुलवशील
...चमेलीत बन वाटा
तळमळणाऱ्या पुळणीवर
आणतिल मोगरी लाटा
पहाटशी तू अमल निरागस
संध्ये परिस ही भोळी
जुन्याच ओळी गुणगुणताना
जमतील सोन पिसोळी.....
तुला कशाला वेणी!...बसशील तेथे लेणी
तुझी पावले ..पावलेss पावले भिडता येईल
तीर्थ कळा पाण्याला
स्वरांच्या उठतो तुझ्या.. स्वरांच्या स्पर्शे येईल
अर्थ नवा गाण्याला
वाळूतील ही तृण पात्याशी
तुझे कोवळे नाते !
तुझ्या दिठीने क्षितीजीचेही अभ्र वितळून जाssते !
तुला कशाला वेणी!..
अशा तुला का हवे प्रसाधन! तूच तुझे ग लेणे !!
तुला पाहिल्यामुळे आमुचे कृतार्थ इथले येणे.... कृतार्थ इथले येणे !!!
तूच तुझे ग लेणे ...
केशी तुझिया फुले उगवतील ,तुला कशाला वेणी ?
चांदण्यास शिणगार कशाला ? बसशील तेथे लेणी !
तुला कशाला वेणी ?

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अनंता तुला कोण पाहु शके

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अनंता तुला कोण पाहु शके
तुला गातसा वेद झाले मुके
मतीमंद अंधा कसा तू दिसे
तुझी रूप तृष्णा मनाला असे

तुझा ठाव कोठे कळेना तरी
गमे माणसा चारूरी माधुरी
तरु वाल्लरीना भूली मी पुसे
तुम्हा निर्मिता देव कोठे वसे

फुले सृष्टीची मानसा राजिती
घरी सोयरी गुंगविती मती
सुखे भिन्नही येथे प्राणी चुके
कुठे चिन्मया ऐक्य लाभू साके

तुझे विश्व ब्रम्हान्डही नि:स्तुला
कृती गावया रे कळेना मला
भुकी बालका माय देवा चुके
तया पाजुनी कोण तोषु शके

नवी भावपुष्पे तुला वाहिली
तशी आर्पीली भक्ति बाष्पाजली
तुझ्या पद्मपत्रावरी ती स्थिरो
प्रभू कल्पना जल्पना त्या हरो
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गीत : बाकीबाब बोरकर
स्वर/संगीत : पंडित जितेंद्र अभिषेकी

गोंईंचें नाव (Remake)


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गोंयचे नाव व्हड करून ल्हान जाले म्हान,
बंदखानीची देवळा जाली लामणदिवे प्राण.
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गीत : बाकीबाब बोरकर
स्वर/संगीत : पंडित जितेंद्र अभिषेकी

आयुष्याची आता...


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आयुष्याची आता झाली उजवण,
येती तो तो क्षण अमृताचा;

जे जे भेटे ते ते दर्पणीचे बिंब,
तुझे प्रतिबिंब लाडेगोडे;

सुखोत्सवे असा जीव अनावर,
पिंजर्याचे दार उघडावे;

संधिप्रकाशात अजून जो सोने,
तो माझी लोचने मिटो यावी;

असावीस पास, जसा स्वप्रभास,
जीवी कासावीस झाल्यावीण;

तेव्हा सखे आण तुळशीचे पान,
तुझ्या घरी वाण त्याची नाही;

तूच ओढलेले त्यासवे दे पाणी,
थोर ना त्याहनी तीर्थ दुजे;

वाळल्या ओठा दे निरोपाचे फूल,
भुलीतली भूल शेवटली.
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गीत : बाकीबाब बोरकर
स्वर/संगीत : सलील कुलकर्णी

तव नयनांचे दल हलले ग !


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तव नयनांचे दल हलले ग !
पानावरच्या दवबिंदूपरी
त्रिभुवन हे डळमळले ग !

तारे गळले, वारे ढळले
दिग्गज पंचाननसे वळले
गिरी ढासळले, सुर कोसळले
ऋषी, मुनी, योगी चळले ग !

ऋतुचाक्राचे आस उडाले
आभाळातुनी शब्द निघाले,
"आवर आवर अपुले भाले
मीन जळी तळमळले ग !"

हृदयी माझ्या चकमक झडली
नजर तुझी धरणीला जडली
दो हृदयांची किमया घडली
पुनरपी जग सावरले ग !
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गीतकार : बाकीबाब बोरकर
स्वर : रविंद्र साठे
*स्वर/संगीत : सलील कुलकर्णी (originally)

जीवन त्यांना कळले हो


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मीपण ज्यांचे पक्व फळापरी
सहजपणाने गळले हो
जीवन त्यांना कळले हो

जलापरी मन निर्मळ ज्यांचे
गेले तेथे मिळले हो
चराचाराचे होऊनी जीवन
स्नेहसां पजळले
जीवन त्यांना कळले हो

सिंधुसम हृदयात जयांच्या
रस सगळे आकळले हो
आपत्काली अन दीनावर
घन होऊनी जे वळले हो
जीवन त्यांना कळले हो

दूरित जयांच्या दर्शनमात्रे
मोहित होऊनी जाळले हो
पुण्य जयांच्या उजवाडाने
फुलले अन परिमळले हो
जीवन त्यांना कळले हो

आत्मदळाने नक्षत्राने
वैभव ज्यांनी तुळीले हो
सायासाविण ब्रम्ह सनातन
घरीच ज्या आढऴले हो
उरीच ज्या आढऴले हो
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गीतकार : बाकीबाब बोरकर
संगीत : भानुकांत लुकतुके
स्वर : श्यामा चित्तार व कैलाशनाथ जैस्वाल

क्या टूटा हैं ?

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क्या टूटा है अन्दर अन्दर, क्यूँ चेहरा कुम्हलाया है
तनहा तनहा रोने वालों, कौन तुम्हें याद आया है

चुपके चुपके सुलग रहे थे, याद में उनकी दीवाने
इक तारे ने टूट के यारों, क्या उनको समझाया है

रंग बिरंगी इस महफ़िल में, तुम क्यूं इतने चुप चुप हो
भूल भी जाओ पागल लोगों, क्या खोया क्या पाया है

है शेर कहाँ है खून है दिल का, जो लफ़्ज़ों में बिखरा है
दिल के ज़ख्म दिखा कर हमने, महफ़िल को गरमाया है

अब ‘शेहजाद’ ये झूठ न बोलो, वो इतने बेदर्द नहीं
अपनी चाहत को हभी परखो, गर इलज़ाम लगाया है
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शायर : आमिर खुसरू
फनकार : मेहंदी हसन

आपूल्या हाती नसते काही

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आपूल्या हाती नसते काही, हे समजावे
कुणी दिसे जर हात आपुले, हाती घ्यावे

कधीच नसतो मातीवरती हक्क आपुला
पाण्याने जर लळा लाविला, रुजून यावे

भिरभिरणार्‍या फुलपाखरा नसेन आशा
विसावले जर, ओजळीचे तर फूल करावे

नको याचना जीव जडवुनी बरसातीची
मेघच जाहले अनीवर, भिजून घ्यावे

नकॉच मनधरनी अर्ताची नको आर्ज़ावे
शब्दानी जर मिठी घातली, गाणे गावे
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गीत: मंगेश पाडगावकर
स्वर: अरुण दाते
संगीत: यशवंत देव

जीना यहाँ मरना यहाँ





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Mukesh

वाकल्या दिशा फुलून

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वाकल्या दिशा फुलून स्निग्ध रांग सावळा,
या गुलात, या सुरात, चंद्र गालतो गळा
पावले अशी सलील नादाती कुठून नाद ?
मी क्षिदीज वाहतो तरी जुळे न शब्द, गीत

दु:ख एक पांगळे जशी तरुणं सावली
या उरात पेटालीस, का उन्हास काहिली ?
असे कसे सुने सुने मला उदास वाटते
जशी उडून पाखरे नभात चालली कुटे ?
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गीत: ग्रेस
स्वर: अरुण दाते
संगीत: श्रीनिवास खळे

असेन मी, नसेन मी

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असेन मी, नसेन मी, तरी असेल गीत हे
फुलाफुलात येथल्या, उद्या हसेल गीत हे

हवेत ऊन भोवती सुवास धुंद दाटले
तसेच काहीसे मनी तुला बघून वाटले
तृणात फूलपाखरू तसे बसेल गीत हे

स्वये मनात जागले न सूर ताल मागते
अबोल राहुनी स्वत: अबोध सर्व सांगते
स्वये मनात जागते न सूर ताल मागते

कुणास काय ठाउके कसे कुठे उद्या असू ?
निळ्या नभात रेखिली नकोस भावना पुसू
तुझ्या मनीच राहिले तुला कळेल गीत हे
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गीत: शांता शेळके
संगीत: यशवंत देव
स्वर: अरुण दाते
राग: भैरवि


रात आधी खींचकर मेरी हथेली


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रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था 'प्यार' तुमने।

फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में
और चारों ओर दुनिया सो रही थी,
तारिकाएँ ही गगन की जानती हैं
जो दशा दिल की तुम्हारे हो रही थी,
मैं तुम्हारे पास होकर दूर तुमसे

अधजगा-सा और अधसोया हुआ सा,

रात आधी, खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था 'प्यार' तुमने।

एक बिजली छू गई, सहसा जगा मैं,
कृष्णपक्षी चाँद निकला था गगन में,
इस तरह करवट पड़ी थी तुम कि आँसू
बह रहे थे इस नयन से उस नयन में,
मैं लगा दूँ आग इस संसार में है
प्यार जिसमें इस तरह असमर्थ कातर,
जानती हो, उस समय क्या कर गुज़रने
के लिए था कर दिया तैयार तुमने!
रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था 'प्यार' तुमने।

प्रात ही की ओर को है रात चलती
औ’ उजाले में अंधेरा डूब जाता,
मंच ही पूरा बदलता कौन ऐसी,
खूबियों के साथ परदे को उठाता,
एक चेहरा-सा लगा तुमने लिया था,
और मैंने था उतारा एक चेहरा,
वो निशा का स्वप्न मेरा था कि अपने पर
ग़ज़ब का था किया अधिकार तुमने।
रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था 'प्यार' तुमने।

और उतने फ़ासले पर आज तक सौ
यत्न करके भी न आये फिर कभी हम,
फिर न आया वक्त वैसा, फिर न मौका
उस तरह का, फिर न लौटा चाँद निर्मम,
और अपनी वेदना मैं क्या बताऊँ,
क्या नहीं ये पंक्तियाँ खुद बोलती हैं--
बुझ नहीं पाया अभी तक उस समय जो
रख दिया था हाथ पर अंगार तुमने।
रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था 'प्यार' तुमने।

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कवि (पिताह:):
हरिवौन्शराय बच्चन
स्वर (बेटा):
अमिताभ बच्चन

गई वो बात की...


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गई वो बात की हो गुफ्तगू तो क्योंकर हो
कहे से कुछ न हुआ फिर कहो तो क्योंकर हो

हमारे ज़ेहन में इस फ़िक्र का है नाम विसाल
की गर न हो तो कहाँ जाएँ हो तो क्योंकर हो

अदब है और यही कशमकश तो क्या कीजे
हया है और यही गोमगो तो क्योंकर हो

तुम्हीं कहो की गुज़ारा सनम परस्तों का
बुतों की हो अगर ऎसी ही खू तो क्योंकर हो

उलझते हो तुम अगर देखते हो आईना
जो तुम से शहर में हो एक दो तो y7f6क्योंकर हो

जिसे नसीब हो रोज़-इ-सियाह मेरा सा
वो शख्स दिन न कहे रात को तो क्योंकर हो

हमें फिर उन से उमीद और उन्हें हमारी कद्र
हमारी बात ही पूछे न वो तो क्योंकर हो

गलत न था हमें ख़त पर गुमान तसल्ली का
न माना दीदा-इ-दीदार जू तो क्यूंकर हो

बताओ उस मिशा को देखकर हो मुझ को करार
यह नेश हो राग-इ-जान में फरो तो क्योंकर हो

मुझे जुनून नहीं ग़ालिब वाले बगौल-इ-हुजूर
फ़िराक-इ-यार में तस्कीन हो तो क्योंकर हो
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शायर : मिर्ज़ा ग़ालिब
फनकारा : मेहनाज़

तुम देना साथ मेरा

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जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पद जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़
जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पद जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़

ना कोई है ना कोई था ज़िंदगे में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़

हो चाँदनी जब तक रात देता है हर कोई साथ
तुम मगर अंधेरोन में ना छ्चोड़ना मेरा हाथ
हो चाँदनी जब तक रात देता है हर कोई साथ
तुम मगर अंधेरोन में ना छ्चोड़ना मेरा हाथ

जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पद जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़
ना कोई है ना कोई था ज़िंदगे में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़

वफ़ादारी की वो रस्में निभाएँगे हम तुम कस्में
एक भी साँस ज़िंदगी की जब तक हो अपने बस में
वफ़ादारी की वो रस्में निभाएँगे हम तुम कस्में
एक भी साँस ज़िंदगी की जब तक हो अपने बस में

जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पद जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़
ना कोई है ना कोई था ज़िंदगे में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़

दिल को मेरे हुआ यकीन हम पहले भी मिले कहीं
सिलसिला ये सदियों का कोई आज की बात नहीं
दिल को मेरे हुआ यकीन हम पहले भी मिले कहीं
सिलसिला ये सदियों का कोई आज की बात नहीं

जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पद जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़
जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पद जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़
ना कोई है ना कोई था ज़िंदगे में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़
तुम देना साथ मेरा ओ हुमनवाज़

भय इथले संपत नाही


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भय इथले संपत नाही मज तुझी आठवण येते
मी संध्याकाळी गातो तू मला शिकविली गीते

ते झरे चंद्र सजणाचे ती धरती भगवी माया
झाडाशी निजलो आपण झाडात पुन्हा उगवाया

तो बोल मंद हळवासा आयुष्य़ स्पर्शूनी गेला
सीतेच्य वनवसातील जणू अंगी राघव शेला

स्तोत्रात इंद्रिये अवघी गुणगुणती दुःख कुणाचे
हे सरता संपत नाही चांदणे तुझ्या स्मरणाचे
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गीत: ग्रेस
गायिका: लता मंगेशकर
संगीत: पंडित हृदयनाथ मंगेशकर

झिणि झिणी वाजे बीन

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झिणि झिणी वाजे बीन
सख्या रे, अनुदिन चीज नविन

कधी अर्थावीण सुभग तराणा
कधी मंत्रांचा भास दिवाणा
सूर सुना कधी केविलवाणा, शरणागत अतिलीन

कधी खटका, कधी रुसवा लटका
छेडी कधी प्राणांतिक घटका
कधी जीवाचा तोडून लचका
घेते फिरत कठीन

सौभाग्ये या सुरात तारा
त्यातून अचपळ खेळे पारा
अलख निरंजन वाजविणारा, सहजपणात प्रविण
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गीतकार :बा. भ. बोरकर
गायक :आशा भोसले
संगीतकार :श्रीधर फडके

ठुमरी | THUMRI - चैन कहा से पाउ

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Thumri is a common style of light classical music. The text is romantic and devotional in nature, and usually revolves around a girl's love for Krishna. The language is a dialect of Hindi called Brij bhaashaa. This style is characterized by a greater flexibility with the raag. The compositions are usually set to kaherava of 8 beats, addha tal of 16 beats, or dipchandi of 14 beats. It arose in popularity during the 19th century.

This thumbri is a combined rendition by Laxmi Shankar and Nirmala Devi. It depicts the passion of love, togetherness and feelings far from reality.

गोंईंचें नाव

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अबाकिबांची शताब्दी सद्या चालू आसा. असंख्यान पैकी एक भांग्राचो नगीना. मझ्या आनि सनंख्य गोयेन्काराचो व अखंड देश तान्का शतः प्रणाम !

*Photography: Sarbjit Singh Bahga*

हृदयाचा नाद लता आशेचा साद