सोचते और जागते...

_________________________

सोचते और जागते साँसों का एक दरिया हून मैं,
अपने गुलदस्ता किनरो के लिए बहता हू मैं

जल गया सारा बदन, इन मासूम की आग मे,
एक मासूम रूह का है, जिसमें अब ज़िंदा हू मैं

मेरे होंटो का तबसूम, दे गया धोका तुझे,
तुमने मुझको बाग जाना, देखले सहारा हू मैं.

देखे मेरी पजीराई को आब आता है कौन,
लम्हा भर तो वक़्त की, दहलीज़ पर आया हू मैं.
_____________

फनकार / मौसीकार : गुलाम अली

ये न थी हमारी क़िस्मत

_________________________

ये न थी हमारी क़िस्मत के विसाल-ए-यार होता
یہ نہ تھی ھماری کسمت کےوسال - ئی - یار ھوتا
(it was not in my fate to meet my lover)

अगर और जीते रहते यही इंतेज़ार होता
اَگر اور جیتےرہتےیہیانتیجار ھوتا
(had I lived longer, this would still be my only desire)

तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
تیرےواد پر جئی ھم تو یہ جان جھوٹ جانا
(to live on your promise is to make my life a lie)

के खुशी से मार ना जाते अगर एइतबार होता
کےخوشی سےمار نا جاتےاگر ئیئتبار ھوتا
(would I not have died of happiness if i trusted it)

तेरी नाज़ुकी से जाना के बँधा था एहेड_बूड़ा
تیری ناجکی سےجانا کےبندھا تھا ئیہیڈ_بوڑا
(from your frailty I learn that the promise was delicate)

कभी तू ना तोर सकता अगर ऊस्तुवार होता
کبھی تو نا تور سکتا اگر اُوستوار ھوتا
(it would not stand broken had you been determined)

कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीम्कश को
کوئی میرےدل سےپوچھےتیرےتیر - ئی - نیمکش کو
(someone ask me about your half-drawn arrow)

ये खलिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता
یہ کھلش کہاںسےھوتی جو جگر کےپار ھوتا
(would i even feel this pain if it had pierced my heart)

ये कहाँ की दोस्ती है के बने हैं दोस्त नासेह
یہ کہاںکی دوستی ہے کےبنےہیں دوست ناسیہ
(what kind of friendship is this, that friends are now advisers)

कोई चारसाज़ होता, कोई घम्गुसार होता
کوئی چارساج ھوتا , کوئی گھمگسار ھوتا
(someone should ease my pain, someone sympathize with me)

राग-ए-संग से टपकता वो लहू की फिर ना थमता
راگ - ئی - سنگ سےٹپکتا وہ لہو کی پھر نا تھمتا
(from every nerve drips blood without restraint)

जिसे गम समझ रहे हो, ये अगर शरार होता
جسےگم سمجھ رہےھو , یہ اگر شرار ھوتا
(as if that which you think is anguish is but a spark)

गम अगरचे जान_गुलिस है, पेर कहाँ बचाईन के दिल है
گم اَگرچےجان_گلس ہے , پیر کہاںبچائین کےدل ہے
(threatening as love is, there is no deliverance from the heart)

गम-ए-इश्क़ गर ना होता, गम-ए-रोज़गार होता
گم - ئی -اشک گر نا ھوتا , گم - ئی - روزگار ھوتا
(if not the torment of love, it would be the torment of life)

कहूँ किस से मैं के क्या है, शब-ए-गम बुरी बला है
کہوںکس سےمیںکےکیا ہے , شب - ئی - گم بری بلا ہے
(whom shall I narrate the pangs of these evenings of sorrow)

मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता
مجھےکیا برا تھا مرنا اگر ایک بار ھوتا
(i would have not resented this death, had it come only once)

हुए मर के हम जो रुसवा, हुए क्यों ना घर्क़-ए-दरिया
ہوئی مر کےھم جو رسوا , ہوئے کیوںنا گھرک - ئی - دریا
(that I died and was disgraced, why was I not just drowned)

ना कभी जनाज़ा उठता, ना कहीं मज़ार होता
نا کبھی جناجا اُٹھتا , نا کہیںمجار ھوتا
(never was there a funeral, no where was a tomb erected)

उसे कौन देख सकता के यगाना है वो यकता
اُسےکون دیکھ سکتا کےیگانا ہے وہ یکتا
(who can see him since his Oneness is without peer)

जो डूई की बू भी होती तो कहीं दो चार होता
جو ڈوئی کی بو بھی ھوتی تو کہیںدو چار ھوتا
(even the scent of his duality would be an introduction)

ये मसायल-ए-तसव्वफ, ये तेरा बयान ग़ालिब
یہ مسایل - ئی - تسووپھ , یہ تیرا بیان گالب
(this mysticism, these statements of yours Ghalib)

तुझे हम वाली समझते, जो ना बाद-ख्वार होता
تجھےھم والی سمجھتے , جو نا بعد - کھوار ھوتا
(you would be a saint, if only you were not inebriated)
_________________

साहिबा बेगम अक्तर




दुनियावालों

_____________

या दिल की सुनो दुनियावालों
या मूज़ को अभी चूप रहने दो
मैं गम को खुशी कैसे कह दू
जो कहते हैं उनको कहने दो

ये फूल चमन में कैसा खिला
माली की नज़र में प्यार नही
हसते हुए क्या क्या देख लिया
अब बहते हैं आँसू बहाने दो

एक ख्वाब खुशी कॅया देखा नही
देखा जो कभी तो भूल गये
माँगा हुआ तुम कुच्छ दे ना सके
जो तुम ने दिया वो सहने दो

क्या दर्द किसी कॅया लेगा कोई
इतना तो किसी में दर्द नही
बहते हुए आँसू अओर बहे
अब आएसी तसल्ली रहने दो

एक ग़ज़ल दो परिप्रेक्ष्य अंदाज़



__________________

जगजीत सिंग
_______________________



__________________

ग़ुलाम अली
_______________________


थोदासा हट के...

__________________

हमीद आली खान
___________________________

कल चौदवी की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कुछ ने कहा यह चाँद है
कुछ ने कहा चेहरा तेरा

हम भी वहीं मौजूद थे
उन्से भी सब पूच्छा किए
हम भी वहीं मौजूद थे
हुंसे भी सब पूच्छा किए

हम हस दिए, हम चुप रहे
मंज़ूर था परदा तेरा
कल चौदवी की रात थी
इस शहेर में किससे मिले

उनसे तो छूती महफिलें
इस शहेर में किससे मिले
उनसे तो छूती महफिलें
हर शक्स तेरा नाम ले

हर शक्स दीवाना तेरा
कल चौदवी की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कल चौदवी की रात थी

कूंचे को तेरे छ्चोड़कर
जोगी ही बन जाए मगर
कूंचे को तेरे छ्चोड़कर
जोगी ही बन जाए मगर

जंगल तेरे, परबत तेरे
बस्ती तेरी, सहेरा तेरा
कल चौदवी की रात थी
बेदर्द सुन्नी हो तो चल

कहता है क्या अच्छि गाज़ल
बेदर्द सुन्नी हो तो चल
कहता है क्या अच्छि गाज़ल
आशिक़ तेरा, रुसवाँ तेरा

शायर तेरा, इंशा तेरा
कल चौदवी की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कल चौदवी की रात थी

में ना हिन्दू न मुसलमान


_________________________

में ना हिन्दू न मुसलमान मुझे जीने दो,
میں نا ھندو نہ مسلمان مجھےجینےدو
दोस्ती है मेरा इमान मुझे जीने दो.
دوستی ہے میراامان مجھےجینےدو

कोई एहसान न करो मुझपे तो एहसान होगा,
کوئی ئیہسان نہ کرو مجھپےتو ئیہسان ھوگا
सिर्फ इतना करो एहसान मुझे जीने दो.
سرپھاتنا کرو ئیہسان مجھےجینےدو

सबके दूख दर्द को अपना समझ के जीना,
سبکےدوکھ درد کو اپنا سمجھ کےجینا
बस यही है मेरा अरमान मुझे जीने दो
بس یہی ہے میرا اَرمان مجھےجینےدو
लोग होते हैं जो हैरान मेरे जीने से,
لوگ ھوتےہیں جو حیران میرےجینےسی
लोग होते रहे हैरान मुझे जीने दो.
لوگ ھوتےرہےحیران مجھےجینےدو
______________________

Lyrics : Shahid Kabir
शायर : शाहिद कबीर
شایر : شاہد کبیر
Music : Talat Aziz
संगीत : तलत अज़ीज़
سنگیت : تلت اَجیج
Singer : Jagjit Singh
स्वर : जगजीत सिंग
سور : جگجیت سنگ

मौत ना आई





________________________

रात गयी कर तारा तारा,
رات مندرجہ ذیل کر تارا تارا
होया दिल दा दर्द अधारा,
ہویا دل دا درد اَدھارا

आखा होइया हंजू हंजू,
آکھا ھوئیا ھنجو ھنجو
दिल दा शीशा परा परा,
دل دا شیشا پرا پرا

हूँ ता मेरे दो ही साथी,
ہوںتا میرےدو ھی ساتھی
एक होका एक हंजू खरा,
ئیک ھوکا ایک ھنجو کھرا

मरना चाहा मौत ना आई,
مرنا سایہ موت نا آئی
मौत वी मैनउ दे गयी लारा
مؤت وی میناُ دے مندرجہ ذیل لارا
________________

ਰਾਤ ਗਯੀ ਕਰ ਤਰਾ ਤਰਾ,
ਹੋਯ ਦਿਲ ਦਾ ਦਰਦ ਆਧਾਰਾ,

ਆਖਾ ਹੋਇਿਆ ਹੰਜੂ ਹੰਜੂ,
ਦਿਲ ਦਾ ਸ਼ੀਸ਼ਾ ਪਾੜਾ ਪਾੜਾ,

ਹੁਣ ਤਾ ਮੇਰੇ ਦੋ ਹੀ ਸਾਥੀ,
ਏਕ ਹੋਕਾ ਏਕ ਹੰਜੂ ਖੜਾ,

ਮਾਰਨਾ ਚਹਾਯਾ ਮੌਤ ਨਾ ਆਈ,
ਮੌਤ ਵੀ ਮੈਨੂ ਦੇ ਗਾਯੀ ਲਾਰਾ
________________

स्वर/संगीत : जगजीत सिंग
سور/سنگیت : جگجیت سنگ
ਸ੍ਵਰ/ਸੰਗੀਤ : ਜਗਜੀਤ ਸਿੰਘ

संया रूठ गये

राग बिलासखानी तोड़ी | Raag Bilaaskhaani ToDi

परदेस


__________

Many times I do get confused as to which would (or could) be the language more comfortable to ‘very’ individual, first in a ‘country-wise’ way followed by across the border and beyond. In may ways I am in a ‘limited’ frame, whether by region, country or beyond. So I decided to use (in this particular context) in a common ‘international’ language in a desi style the emphasis is on local word called ‘hinglish’.

In my ‘half’ the life, beginning from the tender age of 6, music, and more particularly towards the ‘hindustaani thaaT’, I was more accustomed in a mid and north Indian environment. I was certainly to see, watch, hear as well ‘take signature’ of various Ustaad’, Begum’ and Pandit’ such as Pandit Bhimsen Joshi, Pandit Jasraaj, Pandit Vishwamohan Bhat, Pandit Mallikarjoon Mansoor, Ustaad Nijamuddin (tablaa), Begum Parvin Sultaan and any others. And yet, there are many others who are in my collections, I have not been so lucky to meet or see ‘face-to-face’ with several such. One of such is Pandit Ajay Pohankar. I have watched, heard in several Cds, concerts such as Sawai Gandharv in Pune and Kesarbai Kerkar in Goa. But ‘not’ in a ‘closer’ “feelings” of meeting face-to-face. Several times in the recent t.v. channels, I did watch him in the ‘Saa Re Ga Ma Pa’ some months ago. Followed by some selective purchase of CDs too.

I present an additional (amongst many) a Thumri (once again), in an expressive view of one amongst many thumris, by Pandit Ajay Pohankar.

The expressions variates in from forms of love and expressions along with the different change as well feelings in fluctuating seasons connected with ‘loss’ of togetherness, far from reality.
________________________

पंडित अजय पोहनकर

सभी प्यार करते हैं


___________________

ज़िदगी में तो सभी प्यार किया करते हैं
جدگی میں تو سبھی پیار کیا کرتےہیں
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा
میںتو مرکر بھی میری جان تجھےچاہونگا

तू मिला है तो ये एहसास हुआ है मुझको
تو ملا ہے تو یہ احساس ہوا ہے مجھکو
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है
یہ میری عمر موہببت کےلئے تھوڑی ہے
एक ज़रा सा ग़म-इ-दौरान का भी हक है जिस पर
ئیک زرا سا گم -ا - دوران کا بھی ھک ہے جس پر
मैंने वो सांस भी तेरे लिए रख छोड़ी है
میںنے وہ سانس بھی تیرےلئے رکھ چھوڑی ہے
तुझ पे हो जाऊँगा कुर्बान तुझे चाहूँगा
تجھ پےھو جااُونگا کربان تجھےچاہونگا
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा
تجھ پےھو جااُونگا کربان تجھےچاہونگا

अपने जज़्बात में नगमात रचाने के किये
اَپنےجزبات میں نگمات رچانےکےکیہ
मैंने धड़कन की तरह दिल में बसाया है तुझे
میںنے دھڑکن کی طرح دل میں بسایا ہے تجھی
मैं तसव्वुर भी जुदाई का भला कैसे करून?
?میںتسوور بھی جدائی کا بھلا کیسےکرون
मैंने किस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे
میںنے کسمت کی لکیروںسےچرایا ہے تجھی
प्यार का बनके निगेहबान तुझे चाहूंगा
پیار کا بنکےنگیہبان تجھےچاہونگا
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूंगा
میںتو مرکر بھی میری جان تجھےچاہونگا

तेरी हर चाप से जलते हैं खायालूँ में चिराग
تیری ھر چاپ سےپانیتےہیں کھایالوںمیں چراگ
जब भी तू आये जगाता हुआ जादू आये
جب بھی تو آمدنی جگاتا ہوا جادو آیہ
तुझको छूलूं तो ए जान-इ-तमन्ना मुझको
تجھکو چھولوںتو ئی جان -ا - تمننا مجھکو
देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आये
در تک اپنے بدن سےتیری خوشبو آیہ
तू बहारों का है उन्वान तुझे चाहूंगा
تو بہاروںکا ہے اُنوان تجھےچاہونگا
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूंगा
میںتو مرکر بھی میری جان تجھےچاہونگا
___________________

शायर : कतील शिफाई
फ़नकार : मेंदी हसन

घर असावे


______________

ह्या भावगीता मागे माझ्या काही खास आठवणी...
पुण्याच्या नगरीत माझी पहिली १९९०-१९९१ च्या सुमारास झाली. कोकणाच्या ऐयर-गैर ग्रॅजुयेशन पर्यंत गोव्यात होतो. घराच्या चार चवकठात खुल्या मानाने बोलण्याची संधी जवळ जवळ नसल्यातच जमा. मग, गाणे अयकणे, बघणे हाच एक उपाय होता. पण जेव्हा पुण्यात आलो, पहिली पुणे केम्प मधील हिन्दी शाळेतले मुख्य प्राध्यापक सुधाकर प्रभू काकांकडे रहायचो. इथून आयुषाचे नवीन अ-ब-क-ड चालू झाले. त्या सुमारास, प्रभात रोडला एका झेरॉक्ष च्या दुकानात मल्टिपल प्रिंट करून ठेवलेली कविता मनात टपली. मनात कायमची राहिलेली ही कविता आणि ३ खास लोकांकडून मला असंख्य मानसिक बळ, आधार, चेतना आणि एक नवीन जिध्ह असंख्य पणे वाडली. एक शिक्षक, गुरू बरोबर एक मित्र ह्या नात्याने सुध्हा असंख्य प्रेम त्यांच्याकडून मला मिळाले. प्रा. सुधाकर काका कायम हसमुक असायचे. दुसरे म्हणजेच भैईया वैद्य. त्यावेळेस ते डेक्कन बधील आपटे शाळेचे मुख्य प्राध्यापक होते. भैईया काका कायम म्हणायचे 'आपल्या जिध्हिने पुढे चाल, जग तुझ्या मागे येईल'. पोस्ट ग्रॅजुयेशन करताना तीसरे खास म्हणजेच डॉ. शेजवलकर !!!
आणि आयुषाच्या प्रत्तेक टप्प्यात ती कविता व ते तीन 'मित्र', नसा नसात जिवंत राहीले. बर्‍याच वर्षानंतर जेव्हा ती कविता व त्याचे स्वर/संगीत अयकले की जुन्या आठवणी उजणतात. फेसबुक वर स्टिल इमेज पधतिने रिलीस केली होती. पण पुन्हा एकदा पूर्ण विडियो द्वारे. त्याही बरोबार त्या तीन 'मैत्र' व गुरू प्राध्यापकांना शतः प्रणाम!
______________

घर असावे घरा सारखे, नकोच नुसत्या भिंती
इथे असावे प्रेम जिव्हाला, नकोच नुसती नाती.

त्या शब्दांना अर्थ असावा, नकोच नुसती वाणी
सूर जुळावे परस्परांचे, नकोत नुसती गाणी

त्या अर्थाला अर्थ असावा, नकोत नुसती नाणी
अश्रुतुनही प्रित झरावी, नकोत नुसते पाणी

या घर्ट्यातून पिल्लू उडावे, दिव्या घेउनी शक्ति
आकांक्षाचे पंख असावे, उंबरठ्यावर भक्ति


_______________

गीत : विमल लिमये
स्वर/संगीत : श्रीधर फडके


फ़ासले | پھاسلے


____________________

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
پھاسلے ایسی بھی ھونگےیہ کبھی سوچا نہ تھا
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
سامنے بیٹھا تھا میرےاور وہ میرا نہ تھا

वो की खुशबू की तरह फैला था मेरे चार सु
وہ کی خوشبو کی طرح پھیلا تھا میرےچار س
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था
میںاُسےمحسوس کر سکتا تھا چھو سکتا نہ تھا

रात भर उस की ही आहट कान में आती रही
رات بھر اُس کی ھی آہٹ کان میں آتی رہی
झाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था
جھانک کر دکھا گلی میں کوئی بھی آیا نہ تھا

अक्स तो मौजूद थे पर अक्स तन्हाई के थे
اَکس تو موجود تھےپر اَکس تنہائی کےتھی
आइना तो था मगर उस में तेरा चेहरा न था
آئنا تو تھا مگر اُس میں تیرا چہرا نہ تھ

आज उस ने दर्द भी अपने अलहेदाह कर दिए
آج اُس نےدرد بھی اپنے اَلہیداہ کر دئی
आज मैं रोया तो मेरे साथ वो रोया न था
آج میںرویا تو میرےساتھ وہ رویا نہ تھا

ये सभी विरानियाँ उस के जुदा होने से थीं
یہ سبھی ورانیاں اُس کے جدا ھونے سے تھین
आँख धुंधलाई हुई थी शहर धुन्धलाया न था
آنکھ دھندھلائی ہوئی تھی شہر دھندھلایا نہ تھا

याद करके और भी तकलीफ होती थी अदीम
یاد کرکے اور بھی تکلیپھ ھوتی تھی اَدیم
भूल जाने के सिवा अब कोई भी चाराह न था
بھول جانے کے سوا اب کوئی بھی چاراہ نہ تھا
_____________________
शायर : आदीं हाशमी
شایر : آدیںھاشمی
फ़नकार : गुलाम अली
فنکار : گلام اَلی
_____________________

faasle aise bhii ho.nge ye kabhii sochaa na thaa
saamane baiThaa thaa mere aur vo meraa na thaa

vo ki Khushbuu kii tarah phailaa thaa mere chaar suu
mai.n use mahasuus kar sakataa thaa chhuu sakataa na thaa

raat bhar us kii hii aahaT kaan me.n aatii rahii
jhaa.Nk kar dekhaa galii me.n ko_ii bhii aayaa na thaa

aks to maujuud the par aks tanahaa_ii ke the
aa_iinaa to thaa magar us me.n teraa cheharaa na thaa

aaj us ne dard bhii apane alahedah kar diye
aaj mai.n royaa to mere saath vo royaa na thaa

ye sabhii viiraaniyaa.N us ke judaa hone se thii.n
aa.Nkh dhu.Ndhalaa_ii hu_ii thii shahar dhu.Ndhalaayaa na thaa

yaad karake aur bhii takaliif hotii thii ‘Adeem’
bhuul jaane ke sivaa ab ko_ii bhii chaaraah na thaa

_____________________
Lyrics by Adeem Hashmi
Fankaar by Gulam Ali

_____________________

मुका पाउस बरसावा असे वाटते



________________________

मुका पाउस बरसावा असे वाटते
तुझा आवाज ऐकावा असे वाटते
कधी धरशील का माझ्या पुढे तू चेहरा
मलाही चंद्र स्पर्शावा असे वाटते
मुका पाउस बरसावा असे वाटते

जरा गर्दीत मी आता उभा राहतो
कुणी माणूस थांबावा असे वाटते
मुका पाउस बरसावा असे वाटते

मला मी शेवटी कळलो जरी नाही तरी ही
तुला समजून सांगावा असे वाटते
मुका पाउस बरसावा असे वाटते
तुझा आवाज ऐकावा असे वाटते

_________________________

शब्द : सौमित्र
स्वर/संगीत : मिलिंद जोशी

काही बोलायाचे आहे


____________

काही बोलायाचे आहे, पण बोलणार नाही
देवळाच्या दारामध्ये, भक्ती तोलणार नाही

माझ्या अंतरात गंध कल्प कुसुमांचा दाटे
पण पाकळी तयांची, कधी खुलणार नाही

नक्षत्रांच्या गावातले मला गवसले गुज
परि अक्षरांचा संग त्याला मिळणार नाही

मेघ जांभळा एकला राहे नभाच्या कडेला
त्याचे रहस्य कोणाला कधी कळणार नाही

दूर बंदरात उभे एक गलबत रुपेरी
त्याचा कोष किनार्‍यास कधी दिसणार नाही

तुझ्या कृपाकटाक्षाने झालो वणव्याचा धनी
त्याच्या निखार्‍यात कधी तुला जाळणार नाही
________________

गीत :कुसुमाग्रज
गायक :श्रीधर फडके
संगीतकार :यशवंत देव

बाबुल मोरा


_____________________


_____________________


__________________________________________

His (Wajid Ali Shah) poem Bhairavi thumri "Baabul moraa Naihar chhooto jaay" has been sung by several prominent singers, but the version most remembered is by Kundan Lal Saigal for the 1930s movie Street Singer.
This poem will express in 3 perspectives subsequently but not K.L. Saigal.
Watch, hear and see the difference.
_____________________

बाबुल मोरा, नैहर छूटो ही जाए, बाबुल मोरा, नैहर छूटो ही जाए
चार कहार मिल, मोरी डोलिया सजावें (उठायें), मोरा अपना बेगाना छूटो जाए | बाबुल मोरा ...
आँगना तो पर्बत भयो और देहरी भयी बिदेश, जाए बाबुल घर आपनो मैं चली पीया के देश | बाबुल मोरा ...
_____________________

بابُل مورا، نیہر چھُوٹو ہی جائے
بابُل مورا، نیہر چھُوٹو ہی جائے

چار کہار مِل، موری ڈولِیا سجاویں (اُٹھایّں)
مورا اَپنا بیگانا چھُوٹو جائے | بابُل مورا ۔۔۔

آںگنا تو پربت بھیو اؤر دیہری بھیی بِدیش
جائے بابُل گھر آپنو میں چلی پیّا کے دیش | بابُل مورا ۔۔۔
_____________________

She must go to-day, I miss her now at heart ..
What must a father feel, when come
The pangs of parting from his child at home?
__________________________________________


मैं नशे में हूँ...


_____________________________

ठुकराओ या अब के प्यार करो मैं नशे में हूँ
जो चाहो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ

अब भी दिला रहा हूँ यकीं-ऐ-वफ़ा मगर
मेरा ना एतबार करो मैं नशे में हूँ

गिरने दो तुम मुझे, मेरा साग़र संभाल लो
इतना तो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ

मुझको कदम कदम पे भटकने दो वाइज़ों
तुम अपना कारोबार करो मैं नशे में हूँ

फ़िर बेखुदी में हद से गुज़रने लगा हूँ मैं
इतना ना मुझसे प्यार करो मैं नशे में हूँ

दुनिया



~~~~~~~~~~

दुनिया को ये कमाल भी करके दिखाइए
मेरी ज़बीन पे अपना मुक़द्दर सजाईए...

मैं चाँदनी में गूँध के लाया हून रात को,
अब आप इससे कोई सवेरा बनाईए...

सबने किए हैं मुझेपे ज़फ़ाओं के ताज़रूरबे,
एक बार आप भी तो मुझे आज़माईए...

शायद छुपा हो इस मैं कहें नाम आपका,
दुनियाँ से चुपके मेरी ग़ज़ल गुनगुनाई यह...
_____________

शायर : क़तील शिफाइ
फनकार : तलत अज़ीज़

अजुनी रुसून आहे



~~~~~~~~~~

अजुनी रुसून आहे, खुलता कळी खुले ना
मिटते तसेच ओठ, कि पाकळी हले ना !

समजून मी करावी, म्हणुनीच तू रुसावे
मी हास सांगताच, रडताही तू हसावे
ते आज का नसावे, समजावणी पटे ना
धरिला असा अबोला, कि बोल बोलवेना !

का भावली मिठाची, अश्रूत होत आहे
विरणार सागरी ह्या जाणून दूर राहे ?
चाले अटीतटीने, सुटता अ!I सुटेना
मिटविल अंतराला, ऐसी मिठी जुटे ना !

की गुड काही डाव, वरचा न हा तरंग
घेण्यास खोल ठाव, बघाल्यास अंतरंग ?
रुसवा असा कसा हा, ज्या आपले कळेना ?
अजुनी रुसून आहे, खुलता कळी खुले ना !
_________________________

गीत : आ . रा . देशपांडे 'अनिल'
संगीत : पंडित कुमार गंधर्व
स्वर : पंडित कुमार गंधर्व 

नशीली रात में



~~~~~~~~~~

नशीली रात में, जब तुमने जुल्फों को सवार है,
हमारे जस्बये दिल को, उमंगो ने उभरा है,

गुलो को मिल गए रंगत, तुम्हारे सुर्ख गालो से,
सितारों ने चमक पाई, तबसुम के उजालो से,

तुम्हारी मुस्कराहट ने बहारो को निखारा है,
हमारे जस्बये दिल को, उमंगो ने उभरा है,

लबे रंगीन अरे तूबा, गुलाबी कर दिया मौसम,
तुम्हारी शुक नजरों ने शराबी कर दिया मौसम,

नशे में चूर है आलम नशीला हर नजारा है,
हमारे जस्बये दिल को, उमंगो ने उभरा है,
__________________

फ़िल्म : ज़ुल्फ़ के सायें सायें
स्वर/संगीत : जगजीत सिंह

********************

Nashili Raat Mein, Jab Tumne Julfo Ko Sawara Hai,
Hamare Jasbaye Dil Ko, Umaango Ne Ubhara Hai,

Gulo Ko Mil Gaye Rangat, Tumhare Surkh Galo Se,
Sitaro Ne Chamak Payi, Tabasum Ke Ujalo Se,

Tumhari Muskurahat Ne Baharo Ko Nikhara Hai,
Humare Jasbaye Dil Ko, Umaango Ne Ubhara Hai,

Labe Rangeen Are Tooba, Gulabi Kar Diya Mausam,
Tumhari Shook Najro Ne Sharabi Kar Diya Mausam,

Nashe Mein Chur Hai Aalam Nashila Har Najara Hai,
Hamare Jasbaye Dil Ko, Umaango Ne Ubhara Hai,

__________________

Movie :
Zulf Ke Saayen Saayen
Music Composition & Singer :
Jagjit Singh

दाठे कंठ लागे डोळिया पाझर

याच साठी केला अठहास

 

______________

याच साथी केला अठहास शेवटचा दिस गोड व्हावा ॥१॥
आता निश्चितीनें पावलों विसांवा । खुंटलिया धांवा तृष्णेचिया ॥२॥
कवतुक वाटे जालिया वेचाचें । नांव मंगळाचे तेणें गुणें ॥३॥
तुका म्हणे मुक्ति परिणिली नोवरी । आतां दिवस चारी खेळीमेळी ॥४॥

 ________________
 
शब्द : संत तुकाराम संगीतकात : श्रीनिवास खळे
स्वर : पंडित भीमसेन जोशी

किरण आशेचा !!!



_______________________

बुगडी माझी सांडली ग
जाता सातार्‍याला ग जाता सातार्‍याला
चुगली नगा सांगू ग
माझ्या म्हातार्‍याला ग माझ्या म्हातार्‍याला

माझ्या शेजारी तरुण राहतो
टकमक टकमक मला तो पाहतो
कधी खुलेमे जवळ बाहतो
कधी नाही ते भुलले ग बाई
त्याच्या इशार्‍याला त्याच्या इशार्‍याला

घरात न्हवते तेव्हा बाबा
माझ्या मजवर कुठला ताबा
त्याची धिटाई... तोबा तोबा
वितळू लागे ग लोणी बाई
बघता निखार्‍याला बघता निखार्‍याला

त्याने आणिली अपुली गाडी
तयार जुंपुनी खिलार जोडी
मीही ल्याले ग पिवळी साडी
वेड्यावाणी जोडीने ग गेलो
आम्ही बाजाराला आम्ही बाजाराला !

येण्या आधी बाबा परतून
पोचालार मी घरात जाउन
मग पुसतील काना पाहून
काय तेव्हा सांगू मी ग बाई
त्याला बिचार्‍याला त्याला बिचार्‍याला !
__________________

चित्रपट : सांगले ऐका (१९५९)
गीत : ग. गी. माडगुलकर
संगीत : राम कदम
स्वर : आशा भोसले

माझिया मना


~~~~~~~~~~o~~~~~~~~~~

माझिया मना, जरा थांब ना
पाऊली तुझ्या माझिया खुणा
तुझे धावणे अन मला वेदना

माझिया मना, जरा बोल ना
ओळखू कसे मी, हे तुझे ऋतू
एकटी न मी सोबतीस तू
ओळखू कशा मी तुझ्या भावना

माझिया मना, जरा ऐक ना
सांजवेळ ही, तुझे चालणे
रात्र ही सुनी, तुझे बोलणे
उषःकाल आहे नवी कल्पना
_____________________

गीतकार :सौमित्र
गायक :आशा भोसले
संगीतकार :श्रीधर फडके

तरुण आहे रात्र अजूनि



~~~~~~~~~~o~~~~~~~~~~

तरुण आहे रात्र अजूनि, राजसा निजलास का रे
एवढयातच त्या कुशीवर, तू असा वळलास का रे

अजूनही विझल्या न गगनी, तारकांच्या दीपमाळा
अजून मी विझले कुठे रे, हाय तू विझलास का रे

सांग या कोजागिरीच्या चांदण्याला काय सांगू
उमलते अंगांग माझे, आणि तू मिटलास का रे

बघ तुला पुसतोच आहे, पश्चिमेचा गार वारा
रातराणीच्या फुलांचा गंध तू लूटलास का रे

उसळती ट्टदयात माझ्या, अमृताच्या धूंद लाटा
तू किनार्‍या सारखा पण कोरडा उरलास का रे

ओठ अजूनि बंद का रे, श्वास ही मधुमंद का रे
बोल शेजेच्या फुलावर, तू असा रुसलास का रे
_________________________

गीतकार :सुरेश भट
गायक :आशा भोसले
संगीतकार :पं. हृदयनाथ मंगेशकर

वाटेवर काटे



~~~~~~~~~~X~~~~~~~~~~

वाटेवर काटे वेचीत चाललो
वाटेल जसा फुलाफुलात चाललो

मिसळुनी मेळ्यात कधी, एक हात धरुनी कधी
आपुलीच साथ कधी करीत चाललो

आधीचा प्रसाद घेत, पुडची ऐकीत साद
नादातच शीळ वाजवीत चालतो

खांद्यावर बाळगिते, ओझे सुखदु:खाचे
फेकुन देऊन अता परत चाललो
_______________________

स्वर : पंडित वसंतराव देशपांडे
गीत : आ. रा. देशपांडे
संगीत : यशवंत देव

बगल्यानंची माळ फुले



~~~~~~~~~~~~~~~~~~

बगल्यानंची माळ फुले अजुनी अंबरात
भेट तुझी स्मरशी काय तू मनात ?

छेडिती पानात बीन थेंब पावसाचे
ओल्या रानात खुले ऊन अभ्रकाचे
मनकवडा घन घुमतो डोर डोंगरात

त्या गाठी, त्या गोष्टी, नारळिच्या खाली
पौर्णिमाच तव नयनी भर दिवसा झाली !
रिमझिमते अमृत ते विकल अंतरात

हातासह सोन्याची सांज गुंफताना
बगल्यांचे शुभ्र कळे मिळुनी मोजताना
कामालापरी मिटती दिवस उमलुनी तळ्यात

तू गेलीस तोडूनी ती माळ, सर्व धागे,
फडफडणे पंखाचे शुभ्र उरे मागे,
सलते ती तडफड का कधी तुझ्या उरात ?
________________________

गीत : वा. रा. कांत
संगीत : श्रीनिवास खळे
स्वर : पंडित वसंतराव देशपांडे
राग : पहाड़ी (नादवेध)

ह्या कलिका मनातल्या



~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

उघड्या पुन्हा जहल्या जखमा उरातल्या
फुलती तुझ्या स्मृतींच्या कलिका मनातल्या

येऊ कशा निघोनी पाउल अडखळे
विरहात वेचीताना घटना सुखातल्या

उठता तरंग देही हळूवार भावनांचे
स्मरतात त्या अजुनी भेटी वनातल्या

हासूनिया खुणावी ती रात रंगलेली
तू मोजियास होत्या तारा नभातल्या
________________________

गीत: उमाकांत काणेकर | संगीत: श्रीकांत ठाकरे | स्वर: शोभा गुर्टू | राग: मिश्र भैरवी

राग मेघ | RAAG MEGH



~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
काल माझ्या 'जंगलात' ह्या वर्षाचा पहिला पाउस बडला आणि मेघ दाटला.
तेव्हा राग मेघ माझ्या मनात टपला.
______________________

संजीव अभ्यंकर | SANJEEV ABHYANKAR
______________________

Raag Megh is one of the oldest raags in Indian classical music. Raag Megh belongs to the kafi thath and is associated with the rainy season.

एक नज़्म | ئیک نجم



~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

बात निकलेगी तो फिर दूर तलाक़ जाएगी
بات نکلیگی تو پھر دور تلاک جائیگی
लोग बेवजा उदासी का सबब पुच्चेंगे
لوگ بیوجا اُداسی کا سبب پچینگی
यह भी पुच्चेंगे के तुम इतनी परेशहाण क्यूँ हो
یہ بھی پچینگےکےتماتنی پریشہان کیوںھو

उंगलियाँ उठेगी सूखे हुवे बालों की तरफ
اُنگلیاںاُٹھیگی سوکھےھوےبالوںکی ترپھ
एक नज़र देखेंगे गुज़रे हुवे सालों की तरफ
ئیک نظر دکھینگےگجرےھوےسالوںکی ترپھ
चूड़ियो पर भी कई तंज़ किए जाएँगे
چوڑیو پر بھی کئی تنج کئی جائیںگی
काँपते हातहों पे भी फ़िक्र-ए-कसे जाएँगे
کانپتےھاتہوںپےبھی فکر - ئی - کسےجائیںگی

लोग ज़ालिम है हर इक बात का ताना देंगे
جالم ہے ھراک بات کا تانا دنگی
बातों बातों मे मेरा ज़िक्र भी ले आएँगे
باتوںباتوںمیں میرا جکر بھی لےآئیںگی

उनकी बातों का ज़रा सा भी असर मत लेना
اُنکی باتوںکا زرا سا بھی اثر مت لینا
वरना चेहेरे के तासूर से समाज जाएँगे
ورنا چیہیرےکےتاسور سےسماج جائیںگی

चाहे कुच्छ भी हो सावालात ना करना उनसे
چاہےکچچھ بھی ھو ساوالات نا کرنا اُنسی
मेरे बारे मे कोई बात ना करना उनसे
میرےبارےمیں کوئی بات نا کرنا اُنسی
बात निकलेगी तो दूर तलाक़ जाएगी
بات نکلیگی تو دور تلاک جائیگی
__________________________

नज़्म निगार : कफील अज़र
نجم نگار : کپھیل اَجر
संगीत : जगजीत सिंग
سنگیت : جگجیت سنگ
गायक : जगजीत सिंग
گایک : جگجیت سنگ

ताज मेहेल मैं आजाना...


~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
जब आँचल रात का लहराए,
और सारा आलम सो जाए,
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर,
ताजमहल में आ जाना.
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर,
ताजमहल में आ जाना,
जब आँचल रात का लहराए..

यह ताजमहल ज़ो चाहत की,
आँखों का सुनहेरा मोटी है,
हर रात जहाँ दो रूहों की,
खामोशी ज़िंदा होती है,
इस ताज के साए में आकर तुम,
गीत वफ़ा का दोहराना.
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर,
ताजमहल में आ जाना,
जब आँचल रात का लहराए..

तन्हाई है जागी-जागी सी,
माहौल है सोया-सोया हुआ,
जैसे के तुम्हारे ख्वाबों में,
खुद ताजमहल हो खोया हुआ,
हो, ताजमहल का ख्वाब तुम्ही,
यह राज़ ना मैने पहचाना.
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर,
ताजमहल में आ जाना,
जब आँचल रात का लहराए..

जो मौत मोहब्बत में आए,
वो जान से बढ़कर प्यारी है,
दो प्यार भरे दिल रोशन हैं,
वो रात बहुत अंधियारी है,
तुम रात के इस आँधियरे में,
बस एक झलक दिखला जाना,
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर,
ताजमहल में आ जाना,
जब आँचल रात का लहराए..

जब आँचल रात का लहराए,
और सारा आलम सो जाए,
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर,
ताजमहल में आ जाना.
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर,
ताजमहल में आ जाना,
तुम ताजमहल में आ जाना.

उन असो वा असो सावली



~~~~~~~~~~

आशा भोसले व अरुण दाते यांनी गुंफलेली एक उत्कृष्ट मराठी भावगीत (किव्हा 'ग़ज़ल' म्हण्यास गयिर नाही)

मैं और मेरी तन्हाई


____________________

आवारा है गलियों में, मैं और मेरी तन्हाई
آوارا ہے گلیوںمیں , میںاور میری تنہائی

जायें तो कहाँ जायें हर मोड़ पे रुसवाई
جایہںتو کہاںجائیں ھر موڑ پےرسوائی

मैं और मेरी तन्हाई
میںاور میری تنہائی

यह फूल से चेहरे है, हसते हुए घुलदस्ते हैं
یہ پھول سےچہرہ ہے , ھستےہوئے گھلدستےہیں

कोई भी नही अपना बेगाने है सब रास्ते
کوئی بھی نہی اپنا بیگانےہے سب راستی

राहें भी तमाशायी
راہیںبھی تماشایی

मैं और मेरी तन्हाई
میںاور میری تنہائی

अरमान सुलगते हैं सिने में चीता जैसे
اَرمان سلگتےہیں سنےمیں چیتا جیسی

कातिल नज़र आती है, दुनिया की हवा जैसे
کاتل نظر آتی ہے , دنیا کی ھوا جیسی

रोटी है मेरे दिल पर, बजाती हुई शहनाई
روٹی ہے میرےدل پر , بجاتی ہوئی شہنائی

मैं और मेरी तन्हाई
میںاور میری تنہائی

आकाश के माथे पर तारों का चारा है
آکاش کےماتھےپر تاروںکا چارا ہے

पहलू में मगर मेरे ज़ख़्मों का गुलिस्ता है
پہلو میں مگر میرےجخموںکا گلستا ہے

आँखों से लहू टपका दामन में बहार आई
آنکھوںسےلہو ٹپکا دامن میں بہار آئی

मैं और मेरी तन्हाई
میںاور میری تنہائی

हर एक बात पे | ہر ایک بات پی


__________

हर एक बात पे कहते हो तुम की तूऊ क्या है
ہر ایک بات پےکہتےھو تم کی تواُو کیا ہے

तुम्ही कहो के ये अँगाज़-ए-गुफ्तगुउ क्या है
تمہی کہو کےیہ اَنگاج - ئی - گپھتگاُ کیا ہے
__________

मिर्ज़ा ग़ालिब और बेगम आबिदा परवीन की एक बेहतरीन ग़ज़ल
مرجا غالب اور بیگم آبدا پروین کی ایک بیہترین غزل

कोई पास आया | کوئی پاس آیا


____________________

कोई पास आया सवेरे सवेरे
کوئی پاس آیا سویرےسویری

मुझे आज़माया सवेरे सवेरे
مجھےآزمایا سویرےسویری

मेरी दासतान को ज़रा सा बदल कर
میری داستان کو زرا سا بدل کر

मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे
مجھےھی سنایا سویرےسویری

जो कहता था कल शब् संभालना संभालना
جو کہتا تھا کل شب سنبھالنا سنبھالنا

वही लडखडाया सवेरे सवेरे
وہی لڈکھڈایا سویرےسویری

कटी रात साड़ी मेरी मयकदे में
کٹی رات ساڑی میری میکد میں

खुदा याद आया सवेरे सवेरे
کھدا یاد آیا سویرےسویری
__________

गीतकार : साहिद राही | ساہد راہی
गायक : जगजीत सिंग | جگجیت سنگ
संगीतकार : जगजीत सिंग | جگجیت سنگ

ज़िंदगी एक ख्वाब हैं

____________

 
ज़िंदगी ख्वाब है, ख्वाब में झूठ क्या
और भला सच है क्या
सब सच है
ज़िंदगी ख्वाब है

दिल ने हमसे जो कहा, हमने वैसा ही किया
फिर कभी फ़ुर्सत से सोचेंगे बुरा था या भला
ज़िंदगी ख्वाब है

एक कटरा मैईय का जब, पत्थर के होंठों पर पढ़ा
उसके सीने में भी दिल धड़का ये उसने भी कहा
क्या
ज़िंदगी ख्वाब है

एक प्याली भर के मैने, घाम के मारे दिल को दी
ज़हर ने मारा ज़हर को, मुरड़े में फिर जान आ गई
ज़िंदगी ख्वाब है

गाव दिसू लागले...



सुख आणि दु:ख


____________________

पुन्हा एकदा भटान्नी गुंफलेली आयुषाची बेरिज. जेव्हा जेव्हा आयकतो, गुण गुण तो तेव्हा स्वताः ला स्वतः ची बेरिज करतो.
____________________

भोगले जे दुःख त्याला, सुख म्हणावे लागले
एवढे मी भोगिले की मज हसावे लागले

ठेविले आजन्म डोळे, आपुले मी कोरडे
पण दुजांच्या आसवांनी, मज भिजावे लागले

लोक भेटायास आले, काढत्या पायासवे
अन अखेरी कुशल माझे, मज पुसावे लागले

गवसला नाहीच मजला, चेहरा माझा कधी
मी कशी होते मलाही आठवावे लागले

एकदा केव्हातरी मी वचन कवितेला दिले
राखरांगोळीस माझ्या गुणगुणावे लागले
________________________________

गीतकार :सुरेश भट गायक :आशा भोसले संगीतकार :श्रीधर फडके

गुंतवू नको पुन्हा...


_________________

कवितेचा मर्मबंध (मंगेश पाडगावकर), धुंदमधूर बानढिलकी (श्रीनिवास खळे) आणि दोन अलौकिक आवाजांचे हीरे (आशा भोसले व अरुण दाते)

सर्व सर्व विसरु दे गुंतवू नको पुन्हा
येथ जीव जडविणे हाच होतसे गून्हा

हे धुके, अशी हवा, ही उदासता भरे
सूर सूर मिटुनिया लोपलीत पाखरे
हास हास लाडक्या श्रावणातल्य उन्हा

रात्र रात्र जागुनी वाट पहिली कुणी
मंद होऊनी विरे अन् पहाटचान्दणी,
स्वप्न संपुनी असे ये कठोर वांचना

काय मोर तांबतो मेघ दाटता शिरी ?
भान राधिके नुरे ऐकताच बासरी
बंधनात जन्मतो मुक्तिचा खरेपणा

हाक धुंद ही तुझी अंग अंग वेडिते
होऊनी प्रवाह या बंधनात ओढिते
मी मला अजणता गुंतते आशी पुन्हा

हास हास लाडक्या श्रिवणातल्या उन्हा
धुंद धुंद गंध ये दाटूनी फुलाविना

दोस्ती और एहसान | دوستی اور


_______________________

दोस्ती और एहसान | دوستی اور ئیہسان
_______________________


हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गये हैं
ہم دوستی ئیہسان وفا بھول گئے ہیں

ज़िंदा तो हैं जीने की अदा भूल गये हैं
جندا تو ہیں جینےکی اَدا بھول گئے ہیں

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गये हैं
ہم دوستی ئیہسان وفا بھول گئے ہیں

खुश्बू जो लूटा ती है मसालते है उससी को
کھشبو جو لوٹا تی ہے مسالتےہے اُسسی کو

एहसान का बदला यही मिलता है काली को
ئیہسان کا بدلا یہی ملتا ہے کالی کو

एहसान तो लेते है सिला भूल गये हैं
ئیہسان تو لیتےہے سلا بھول گئے ہیں

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गये हैं...
ہم دوستی ئیہسان وفا بھول گئے ہیں

करते है मोहब्बत का और एहसान का सौदा
کیرتےہے موہببت کا اور ئیہسان کا سؤدا

मतलब के लिए करते है ईमान का सौदा
متلب کےلئے کرتےہے ئیمان کا سؤدا

दर्र मौत का और ख़ौफ़-ए-खुदा भूल गये हैं
درر موت کا اور خؤف - ئی - کھدا بھول گئے ہیں

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गये हैं...
ہم دوستی ئیہسان وفا بھول گئے ہیں

अब मों के घर पेर कोई पठार नही होता
اَب موںکےگھر پیر کوئی پٹھار نہی ھوتا

अब कोई भजी क़ुरबान किसी पेर नही होता
اَب کوئی بھجی کربان کسی پیر نہی ھوتا

यूँ भटके है मंज़िल का वफ़ा भूल गये हैं...
یوںبھٹکےہے منزل کا وفا بھول گئے ہیں
_________________

रंग माझा वेगळा !


________________________


रंगुनी रंगांत सार्या रंग माझा वेगळा !
गुंतुनी गुंत्यात सार्या पाय माझा मोकळा !
कोण जाणे कोठुनी ह्या सावल्या आल्या पुढे;

मी असा की लागती ह्या सावल्यांच्याही झळा !
राहती माझ्यासवे ही आसवे गीतांपरी;

हे कशाचे दुःख ज्याला लागला माझा लळा!
कोणत्या काळी कळेना मी जगाया लागलो,

अन् कुठे आयुष्य गेले कापुनी माझा गळा ?
सांगती 'तात्पर्य' माझे सारख्या खोट्या दिशा :

'चालणार पांगळा अन् पाहणारा आंधळा !'
माणसांच्या मध्यरात्री हिंडणारा सूर्य मी :

माझियासाठी न माझा पेटण्याचा सोहळा !

मैं चाहता भी यही था...


_______________________

मैं चाहता भी यही था वो बेवफा निकले
میںچاہتا بھی یہی تھا وہ بیوپھا نکلی

उससे समझने का कोई तो सिलसिला निकले
اُسسےسمجھنےکا کوئی تو سلسلا نکلی

किताब-ए-माज़ी के पन्ने उलट के देख ज़रा
کتاب - ئی - ماجی کےپننےاُلٹ کےدیکھ
جرا

ना जाने कौनसा पन्ना मुड़ा हुआ निकले
نا جانےکؤنسا صفحہ مڑا ہوا نکلی

किताब-ए-माज़ी के कौनसा उलट के देख ज़रा
کتاب - ئی - ماجی کےکؤنسا اُلٹ
کےدیکھ جرا

ना जाने कौन सा सफ़हा मुड़ा हुआ निकले
نا جانےکون سا سفہا مڑا ہوا نکلی

जो देखने मे बोहोट ही करीब लगता है
جو دیکھنے میں بوہوٹ ھی قریب لگتا ہے

उस के बारे मे सोचु तो फासला निकले
اُس کےبارےمیں سوچ تو پھاسلا نکلی

मैं चाहता भी यही था वो बेवफा निकले
میںچاہتا بھی یہی تھا وہ بیوپھا نکلی

उससे समझने का कोई तो सिलसिला निकले
اُسسےسمجھنےکا کوئی تو سلسلا نکلی
__________________

शायर : वासिम बरेलवी
شیار : واسم بریلوی
मौसिकार : जगजीत सिंह
موسیکار : جگجیت سنگھ
फनकार : जगजीत सिंह
فنکار : جگجیت سنگھ

चार होत्या पक्षिणी त्या



_________________

चार होत्या पक्षिणी त्या रात्र होती वादळी
चार कंठी बांधलेली एक होती साखळी

दोन होत्या त्यात हंसी राजहंसी एक ती
आणि एकीला कळेना जात माझी कोणती

शुभ्र पंखांतून त्यांच्या वीज होती साठली
ना कळे एकीस की माझी लियाकत कोठली

तोडुनी आंधी तुफाने चालल्या, ती चालली
तीन होत्या दीपमाला एक होती सावली

बाण आला तो कोठुन जायबंदी हो गळा
सावलीला जाण आली जात माझी कोकिळा

कोकिळेने काय केले ? गीत झाडांना दिले
आणि मातीचे नभाशी एक नाते सांधले

मी सुरांच्या अत्तराने रात्र सारी शिंपली
साधनेवर वेदनेवर रागदारी ओतली

ती म्हणाली, एकटी मी राहिले तर राहिले
या स्वरांचे सूर्य झाले, यात सारे पावलेहोती
_____________

नाटक : वीज म्हणाली धरतीला (१९७०)
गीत : वि. वा. शिरवाडकर
संगीत : पं. वसंतराव देशपांडे
स्वर : फैयाज

आधार कसा शोधावा




__________________________
मन मनास उमगत नाही, आधार कसा शोधावा ?
स्वप्नातील पदर धुक्याचा, हातास कसा लागावा ?

मन थेंबांचे आकाश, लाटांनी सावरलेले
मन नक्षत्रांचे रान, अवकाशी अवतरलेले
मन गरगरते आवर्त, मन रानभूल, मन चकवा

मन काळोखाची गुंफा, मन तेजाचे राऊळ
मन सैतानाचा हात, मन देवाचे पाऊल
दुबळया, गळक्या झोळीत हा सूर्य कसा झेलावा

चेहरा, मोहरा ह्याचा कुणी कधी पाहीला नाही
धनी अस्तित्वाचा तरीही, ह्याच्याविण दुसरा नाही
ह्या अनोळखी नात्याचा, कुणी कसा भरवसा द्यावा
__________________________
_______
गीतकार :सुधीर मोघे
गायक :श्रीधर फडके
संगीतकार :श्रीधर फडके


EAST & WEST



(in the heart of my 'juntion point' at http://my-auroville-diary.blogspot.com/)

सुंदर ते ध्यान | சுந்தர் தே தியங்

___________

सुंदर ते ध्यान उभे विठेवरी
कर कतवरी तेहुनिया

तुळसी हार गळा कांसे पीटंबेर
आवडे निरंतर तेचि रूप

मकर कुंडले तळपटी श्रवणी
कांती कौस्थुभमणी विराजाती

तुका म्हणे मेज़ हेची सर्व सुख
पाहिना श्रिमुख आवडीने
________________

पुन्हा एकदा...
भक्तीगीत : सुंदर ते ध्यान
शब्द : संत तुकाराम
स्वर : पंडित कुमार गंधर्व


******************* 



______________________


சுந்தர் தே தியங் உபே விட்ஹெவரீ
கார் கடதவறீ தேஹுணிய

துளஸீ ஹார் கால காண்ஸெ பீடாம்பேர்
ஆவ்தே நிரண்தார் தேசி ரூப்

மாக்கார் குண்த்லே தளபடீ ஷ்ர்வணி
காந்தி கௌஸ்த்துப்மணீ வீராஜடீ

தூக்க ம்ஹணெ மேஸ் ஹேசி சார்வ் சூக்
பஹினா ஷ்ரிமுக் ஆவாதினே
_______________


ஸ்வரம் : ச். சுபுலக்ஷ்மீ

गेले ते दिन गेले



वेगवेगळी फुले उमलली, रचुनि त्यांचे झेले; एकमेकांवरी उधळले, गेले ते दिन गेले
कदंब तरुला बांधून दोला, उंच खालती झोले; परस्परांनी दिले घेतले, गेले ते दिन गेले
हरीत बिलोरी वेलबुटीवरी, शीतरसांचे प्याले; अन्योन्यांनी किती झोकले, गेले ते दिन गेले
निर्मल भावे नव देखावे, भरुनी दोन्ही डोळे ; तू मी मिळूनी रोज पाहिले, गेले ते दिन गेले


या चिमण्यांनो परत फिरा रे



या चिमण्यांनो परत फिरा रे, घराकडे अपुल्या
जाहल्या तिन्हीसांजा जाहल्या

दहा दिशांनी येईल आता, अंधाराला पूर
अशा अवेळी असू नका रे आईपासुन दूर
चुकचुक करिते पाल उगीचच चिंता मज लागल्या

इथे जवळच्या टेकडीवरती, आहो आम्ही आई
अजून आहे उजेड इकडे, दिवसहि सरला नाही
शेळ्या, मेंढ्या अजुन कुठे ग, तळाकडे उतरल्या

अवतीभवती असल्यावाचुन, कोलाहल तुमचा
उरक न होतो आम्हा आमुच्या कधिही कामाचा
या बाळांनो, या रे लौकर, वाटा अंधारल्या
_______________

गीत : ग. दि. माडगूळकर
संगीत : श्रीनिवास खळे
स्वर : लता मंगेशकर
चित्रपट : जिव्हाळा (१९६८).

संगीत...