मेरे दिल में तू ही तू है


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मेरे दिल में तू ही तू है, दिल की दवा क्या करूँ
अभी:
दिल भी तू है जाँ भी तू है, तुझपे फ़िदा क्या करूँ
अभी-सुभी: 
मेरे दिल में तू ही तू है, दिल की दवा क्या करूँ
सुभी:
खुद को खो के तुझको पाकर क्या\-क्या मिल क्या कहूँ
तेरी होके जीने में क्या आय मज़ा क्या कहूँ
अभी:
कैसे दिन हैं कैसी रातें कैसी फ़िज़ा क्या कहूँ
मेरी होके तूने मुझको क्या क्या दिया क्या कहूँ
सुभी:
मेरे पहलू में जब तू है फिर मैं दुआ क्या करूँ
अभी:
दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा क्या करूँ
अभी-सुभी:
मेरे दिल में तू ही तू है, दिल की दवा क्या करूँ
अभी:
है ये दुनिया दिल की दुनिया मिलके रहेंगे यहाँ
लूटेंगे हम खुशियाँ हर पल दुःख न सहेंगे यहाँ
सुभी:
अरमानो के चंचल धारे ऐसे बहेंगे यहाँ
ये तो सपनो की जन्नत है, सब ही कहेंगे यहाँ
ये दुनिया मेरे दिल में बसी है, दिल से जुदा क्या करूँ
अभी:
दिल भी तू है जाँ भी तू है, तुझपे फ़िदा क्या करूँ
अभी-सुभी: 
मेरे दिल में तू ही तू है, दिल की दवा क्या करूँ

तुझ्या मुळे आला नवा अर्थ माझ्या जीवनाला


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तुझ्या मुळे आला नवा अर्थ माझ्या जीवनाला,
देव कुणाच्या रुपात असा भेटे माणसाला...

तिला आधाराला हात सोपी झाली पायवाट,
कशी अवचीत्ती आली अशी सुखाची पहाट,
घेऊ स्वच्छंदी भरार्या दाहीदिशा स्वागताला,

तुझ्या मुळे आला नवा अर्थ माझ्या जीवनाला,
देव कुणाच्या रुपात असा भेटे माणसाला...
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स्वर : जगजित सिंघ

करितां विचार सांपडलें वर्म !


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करितां विचार सांपडलें वर्म ।
समूळ निश्रम परिहाराचें ॥१॥

मज घेऊनिया आपणांसी द्यावें ।
साटी जीवें जीवें नारायणा ॥२॥

उरी नाहीं मग पडदा कां आला ।
स्वमुखें चि भला करितां वाद ॥३॥

तुका म्हणे माझें खरें देणें घेणें ।
तुम्ही साक्षी जाणें अंतरीचें ॥४॥
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रचना -  संत तुकाराम
स्वर  -  प्रभाकर कारेकर

गेले, ते दिन गेले !


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वेगवेगळी फुले उमलली रचुनि त्यांचे झेले
एकमेकांवरी उधळले
गेले, ते दिन गेले !

कदंब-तरूला बांधुन दोला उंच-खालती झोले
परस्परांनी दिले-घेतले
गेले, ते दिन गेले !

हरित-बिलोरी वेलबुटीवरी शीतरसांचे प्याले
अन्योन्यांनी किती झोकले
गेले, ते दिन गेले

निर्मलभावे नव देखावे भरुनी दोन्ही डोळे
तू मी मिळुनी रोज पाहिले
गेले, ते दिन गेले !
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गीत  -  भवानीशंकर पंडित
संगीत -  श्रीनिवास खळे
स्वर  -  पं. हृदयनाथ मंगेशकर
 

A Message


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LEARN and HELP
as if you are going to live forever.
LIVE
as if you were going to die tomorrow.

फ़रिश्तों की नगरी में आ गया हूँ मैं


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फ़रिश्तों की नगरी में मैं आ गया हूँ मैं
आ गया हूँ मैं
ये रानाईयां देख चकरा गया हूँ मैं
आ गया हूँ मैं

यहां बसने वाले बड़े ही निराले
बड़े सीधे सादे बड़े भोले भाले
पती-पत्नी मेहनत से करते हैं खेती
तो दादा को पोती सहारा है देती
यहाँ शीरीं फ़रहाद कंधा मिला कर
हैं ले आते झीलों से नदियां बहा कर
ये चाँदी की नदियां बहे जा रही हैं
कुछ अपनी ज़ुबाँ में कहे जा रही हैं
फ़रिश्तों की नगरी में...

कन्हैया चला ढोर बन में चराने
तो राधा चली साथ बंसी बजाने
बजी बाँसुरी नीर आँखों से छलका
मुझे हो गया है नशा हल्का हल्का
परींदे मेरे साथ गाने लगे हैं
इशारों से बादल बुलाने लगे हैं
हसीं देख कर मुस्कुराने लगे हैं
कदम अब मेरे डगमगाने लगे हैं
फ़रिश्तों की नगरी में...

अरे वाह लगा है यहाँ कोई मेला
तो फिर इस तरह मैं फिरूं क्यूं अकेला
मैं झूले पे बैठूंगा चूसूंगा गन्ना
किसी का तो हूँ मैं भी हरियाला बन्ना
ओ भैय्या जी लो ये दुअन्नी संभालो
चलो मामा उतरो मुझे बैठने दो
फ़रिश्तों की नगरी में...
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शायर : केदार शर्मा
संगीतकार : स्नेहल भाटकर
फनकार : मुकेश
चित्रपट : हमारी याद आयेगी

पप्पा सांगा कुणाचे ?


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ल ल्ला लला ललला, ल ल्ला लला ललला

पप्पा सांगा कुणाचे ? पप्पा माझ्या मम्मीचे !
मम्मी सांगा कुणाची ? मम्मी माझ्या पप्पांची !

इवल्या इवल्या घरट्यात, चिमणा चिमणी राहतात
चिमणा-चिमणी अन्‌ भवती, चिमणी पिल्लेही चिवचिवती !

आभाळ झेलते पंखांवरी, पप्पांना घरटे प्रिय भारी
चोचीत चोचीने घास द्यावा, पिल्लांचा हळूच पापा घ्यावा !

पंखाशी पंख हे जुळताना, चोचीत चोचही मिळताना
हासते नाचते घर सारे, हासते छ्प्पर, भिंती, दारे !
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गीत  -  शान्‍ता शेळके
संगीत -  सी. रामचंद्र
स्वर -  राणी वर्मा,  प्रमिला दातार,  अरुण सरनाईक
चित्रपट- घरकुल (१९७०)

मन मनास उमगत नाही


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मन मनास उमगत नाही, आधार कसा शोधावा ?
स्वप्नातील पदर धुक्याचा, हातास कसा लागावा ?

मन थेंबांचे आकाश, लाटांनी सावरलेले
मन नक्षत्रांचे रान, अवकाशी अवतरलेले
मन गरगरते आवर्त, मन रानभूल, मन चकवा

मन काळोखाची गुंफा, मन तेजाचे राऊळ
मन सैतानाचा हात, मन देवाचे पाऊल
दुबळया, गळक्या झोळीत हा सूर्य कसा झेलावा

चेहरा, मोहरा ह्याचा कुणी कधी पाहीला नाही
धनी अस्तित्वाचा तरीही, ह्याच्याविण दुसरा नाही
ह्या अनोळखी नात्याचा, कुणी कसा भरवसा द्यावा
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गीतकार :सुधीर मोघे
गायक :श्रीधर फडके
संगीतकार :श्रीधर फडके

राग सोहनी - उस्ताद रशीद खान


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राग सोहनी - उस्ताद रशीद खान

आज माझ्या अक्षरांना


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आज माझ्या अक्षरांना वचन दे रसिका तुझे
या स्वरांच्या चांदण्याला गगन दे रसिका तुझे

अक्षरांच्या लोचनांतुन गगन जरि हे निथळले
मी तुझ्यासाठीच केवळ बहर माझे उधळले
कल्पनावेलीस माझ्या सुमन दे रसिका तुझे

मी जगाचे ओठ झालो, बोलतो आहे खरे
दु:खितांचे दु:ख माझ्या अक्षरांतुन पाझरे
आसवे बघण्या व्यथांची नयन दे रसिका तुझे

काळजामाजि फुलांच्या भावना ओथंबल्या
एवढ्यासाठीच रात्री तारका खोळंबल्या
आज कवितेच्या उषेला किरण दे रसिका तुझे
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गीत     -     रमण रणदिवे   
स्वर     -     सुरेश वाडकर

श्रद्धांजली


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Tribute to Maestro Late Pandit Ravi Shankar

गोळाबेरीज


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चित्रपट : गोळाबेरीज
संगीतकार : मिलिंद जोशी
निखील रत्नपार्खि, दिलीप प्रभावळकर, द्र. मोहन आगाशे, भारत जाधव, संजय नार्वेकर, अविनाश नारकर, सुबोध भावे, मुक्ता बर्वे, भारगावी चिरमुले, प्रसाद ओक, शरद पॉंक्षे, पुष्कर श्रोत्रि, हेमांगी कवी, वैभव मंगले, सतीश पुलेकर, अभिजीत शावॅन, जयंत वाडकर, विद्याधर जोशी, क्षितिज झरपकर, कमलाकर सातपुटे, द्र. नेहा देशपांडे-कामात

जेव्हा तुला मी पाहिले

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जेव्हा तुला मी पाहिले, वळुनी पुन्हा मी पाहिले

काही न आता आठवे, होतो कधी का भेटलो
पटता खुणा या वाद का, होतो कधी का भेटलो ?
या सागराने का कधी होते नदीला पाहिले ?

जाणी तुझे नच नाव मी, प्रीती अनामिक जन्मता
वारा विचारी का फुला, हा गंध आहे कोणता ?
तू ऐस कोणी कामिनी, मी स्वामिनी तुज मानिले !

होऊन एकच चालणे, या दोन वाटा संपती
उंचावते तेथे धरा, आभाळ येई खालती
हरतात दोघेही जिथे, कोणी कुणाला जिंकिले ?
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गीत - वसंत निनावे
संगीत - बाळ बर्वे
स्वर - तलत महमूद

একলা চলো রে - चल अकेला रे - go ahead alone


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যদি তোর ডাক শুনে কেউ না আসে তবে একলা চলো রে ।
একলা চলো, একলা চলো, একলা চলো, একলা চলো রে ॥
যদি কেউ কথা না কয়, ওরে ওরে ও অভাগা,
যদি সবাই থাকে মুখ ফিরায়ে সবাই করে ভয়—
তবে পরান খুলে

ও তুই মুখ ফুটে তোর মনের কথা একলা বলো রে ॥
যদি সবাই ফিরে যায়, ওরে ওরে ও অভাগা,
যদি গহন পথে যাবার কালে কেউ ফিরে না চায়—
তবে পথের কাঁটা
ও তুই রক্তমাখা চরণতলে একলা দলো রে ॥
যদি আলো না ধরে ওরে ওরে ও অভাগা,
যদি ঝড়-বাদলে আঁধার রাতে দুয়ার দেয় ঘরে-
তবে বজ্রানলে
আপন বুকের পাঁজরা জ্বালিয়ে নিয়ে একলা জ্বলো রে
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here is the hindi translation:

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
ओ तू चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे

यदि कोई भी ना बोले ओरे ओ रे ओ अभागे कोई भी ना बोले
यदि सभी मुख मोड़ रहे सब डरा करे
तब डरे बिना ओ तू मुक्तकंठ अपनी बात बोल अकेला रे
ओ तू मुक्तकंठ अपनी बात बोल अकेला रे

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे

यदि लौट सब चले ओरे ओ रे ओ अभागे लौट सब चले
यदि रात गहरी चलती कोई गौर ना करे
तब पथ के कांटे ओ तू लहू लोहित चरण तल चल अकेला रे

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे

यदि दिया ना जले ओरे ओ रे ओ अभागे दिया ना जले
यदि बदरी आंधी रात में द्वार बंद सब करे
तब वज्र शिखा से तू ह्रदय पंजर जला और जल अकेला रे
ओ तू हृदय पंजर चला और जल अकेला रे

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
ओ तू चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
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If they answer not to thy call walk alone.
If they are afraid and cower mutely facing the wall,
O thou unlucky one,
open thy mind and speak out alone.
If they turn away, and desert you when crossing the wilderness,
O thou unlucky one,
trample the thorns under thy tread,
and along the blood-lined track travel अलोन.
If they do not hold up the light when the night is troubled with storm,
O thou unlucky one,
with the thunder flame of pain ignite thy own heart
and let it burn alone.

First (mentioned above bangali) is a one amongst many poetry treasure of Robindranath Thakur (Tagore) followed below is the translation in prose of the Bengali original rendered by Rabindranath Tagore himself.
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स्वर : किशोर कुमार

गुलों में रंग भरें बाद-ए-नौबहार चले


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गुलो मे राग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आ ओ के गुलशन का कार-ओ-बार चले

क़ाफास उदास है यारो सबा से कुच्छ तो कहो
कही तो बाहर-ए-खुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले

जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिजरां
हमारे अश्क तेरी आकबत संवार चले

मकाम 'फ़ैज़' कोई राह मे जाँचा ही नही
जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले

कभी तो सुबह तेरे कुज-ए-लब से हो आगाज़
कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्काबार चले

बड़ा है दर्द का रिश्ता ये दिल ग़रीब सही
तुम्हारे नाम पे आएगे गम-गुसार चले

हुज़ूर-ए-यार हूइ दफ़्तर-ए-जुनून की तलब
गिरह मे ले के गिरेबान का तार तार चले
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 शायर : फ़िज़ अली फ़िज़
फनकार : मेहँदी हसन

दे साद दे हृदया



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दे साद दे, हृदया
जन्मांतरींचा ध्यास हो, हृदया

तृष्णेचा घट हा, धन हे माझे;
जळ हे भवती गमले ओझे
पैलतिरीचा मेघ हो हृदया

जन्मांचा पथ हा, जुळले धागे
छायेपरी ही नियती येई मागे
त्या संचिताचा सूर हो हृदया

जागली क्षणघनमाला
जन्मच अवघा बरसून आला
त्या चेतनेचा श्वास हो हृदया
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गीत - प्रवीण दवणे
संगीत - श्रीधर फडके
स्वर - आरती अंकलीकर-टिकेकर, सुरेश वाडकर

राग सूर मल्हार


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Malhaar is an old raag in Indian classical music. Malhaar is associated with the atmosphere of torrential rains. Besides the basic Shuddha Malhaar, which was the original Malhaar, there are several Malhaar-related raags that use the Malhaar signature phrase m (m)R (m)R P, including Miyaan Malhar, Ramdasi Malhaar, Gaud Malhaar, Sur Malhaar, Des Malhaar, Nat Malhaar, and Meera ki Malhaar.
According to legend, raag Malhaar is so powerful that when sung, it can induce rainfall. Although this has not been scientifically proved yet, it is possible that the rainfall that the legends speak of is in fact metaphorical of the state of mind brought about by the recital of the raag.
There are many written accounts of Raag Malhar. Many great artists of the medieval period and much earlier periods used to sing this raag. Tansen, Baiju Bawra, Baba Ramdas, Nayak Charju, Miyaan Bakhshu, Tantarang, Tanras Khan, Bilas Khan (son of Tansen), Hammer Sen, Surat Sen, and Meera are among the singers who are said to have been capable of starting rains using various kinds of Raag Malhar.
According to a legend, once the Mughal emperor Akbar asked his court musician Tansen to sing Raga Deepak, the raag of fire. The effect was such that all the lamps in the courtyard lit up themselves, and Tansen's body became so hot that he had to sit in the nearby river to cool himself. However, the river began to boil, and it became apparent that Tansen would soon boil to death. He set out on a search to find someone who could sing Raga Malhar to cure him. In due course he reached Vadnagar, in Gujarat, where he found two sisters, Tana and Riri, whom he asked for help. They agreed to sing Raag Malhar to cure him. When they sang the Raag, rains came down in torrents, which cooled Tansen's body immediately.
Listening to this gem video, connoisseurs will be moved by the manificence of Raag Sur Malhaar, Pandit Bhimsen Joshi in his own innovation. The themes are live, sprightly, ornamental yet virile. Each unfolds a sound visual that exudes a baroque-style dignity and grandeur secured through steady pregression and precise accentuation of its salient notes in the slow movement. A variety of cascadeing "taans" lend an evocative quality to the "drut" singing. This is a sub-melody of the celebrated raag Malhaar and is credited to the eminent musician and saint Surdas and in the second quarter of the night.

 
थाट : काफ़ी
जाती : औदव - शदव
वादी स्वर : म
संवादी स्वर : सा
समय : मौसम
आरोह : सा रे म प नी सां ।
अवरोह : सां नी॒ ध म प म रे सा ।
 
I compiled Raag Sur Malhaar rendered by Pandit Bhimsen Joshi in 'Garjat Aaye' in Khayal Vilambit ektaal followed by 'Badarwa barsan lage' in Khyal Drut tritaal and tabla sangat by Nana Muley.

गोमु माहेरला जाते हो नाखवा



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गोमू माहेरला जाते हो नाखवा
तिच्या घोवाला कोकण दाखवा

दावा कोकणची निळी-निळी खाडी
दोन्ही तीराला हिरवी-हिरवी झाडी
भगवा अबोली फुलांचा ताटवा

कोकणची माणसं साधी भोळी
काळजात त्यांच्या भरली शहाळी
उंची माडांची जवळून मापवा

सोडून दे रे खोड्या सार्‍या
शिडात शिर रे अवखळ वार्‍या
झणी धरणीला गलबत टेकवा
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गीत - ग. दि. माडगूळकर
संगीत - दत्ता डावजेकर
स्वर - पं. जितेंद्र अभिषेकी

हे चांदणे ही चारुता




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हे चांदणे, ही चारुता, ही भावभोळी लोचने
मधुचंद्र हा, मधु यामिनी, ही प्रीतीची मधु गुंजने

पानांतुनी हलके फुले कळी कोवळी सुम होऊनी
मधुगंध हा तव प्रीत का ऐसी सुखाची गायने

सुख मोहरे तनु बावरे हळुवार कापे मोहुनी
ये ये अशी या मानसी फुलवीत प्रीती पैंजणे
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गीत - शांताराम नांदगावकर
संगीत - अनिल मोहिले
स्वर - कुंदा भागवत, अरुण दाते

तनमनाच्या मंदिरी या जागवू या चेतना


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तनमनाच्या मंदिरी या जागवू या चेतना
अर्थ लाभो जीवनाला हीच अमुची प्रार्थना

चेतना माझ्यातही, याच्यातही, त्याच्यातही
पृथ्वी-जल-आकाश अन्‌ वायुतही, तेजातही
विश्वव्यापी या स्वरूपा नित्य माझी वंदना

एक आहे मागणे हातात या सामर्थ्य येवो
भीक-लाचारी-दयेचा स्पर्श ना आम्हांस होवो
कष्ट करु आयुष्य फुलवू मंत्र जप रे तू मना

घेतले व्रत आज आम्ही स्वप्‍न ते सत्यात येवो
दीन-दुर्बल-वंचितांचा विसर ना आम्हांस होवो
या जगी आनंद नांदो ही मनाची कामना
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गीत - पवन खेबूडकर
संगीत - अशोक पत्की
स्वर - शौनक अभिषेकी

हे पत्र तुला लिहिताना



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हे पत्र तुला लिहिताना का अबोल होते शाई ?
का रंग खरा शब्दांचा पानावर उमटत नाही ?
नभ ओळवते, मन मोहरते, पण तोल जात नाही
अनिवार सरी, उरतात उरी, बरसात होत नाही

ह्या अजाण शब्दांच्या ओठी अल्लड गाणे
हे वयात येणारे अवखळ अमोल तराणे
हे कागद-कोरे अंगण, आतूर भिजाया कणकण
कधी बावरे, कधी सावरे, मन बोलत नाही काही

त्या तुझ्या किनार्‍याला जाती लाखो लाटा
कोणत्या दिशा माझ्या, कोणत्या माझ्या वाटा
व्याकूळ मनाच्या द्वारी, अस्वस्थ क्षणांची वारी
क्षण अक्षरे, क्षण भोवरे अन्‌ अजूनी बरेच काही
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गीत     - वैभव जोशी
संगीत - अशोक पत्की
स्वर - सुवर्णा माटेगावकर

लख लख चांदणं कोजागिरीच


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शुभ शरद पौर्णिमेच्या (कोजागिरी) शुभेच्छा !!!

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लख लख चांदणं कोजागिरीचं
टपोरं डोळ्यांनी बघायचं रं,
रातभर सजणा जागायचं रं !

चंदेरी फुलांच्या गोफुन माळा,
चल ये सजणे घाल माझ्या गळा
झिमझिम शिंपीत प्रितीचं चांदणं,
जोडीनं गोडीनं फिरायचं रं
टपोरं डोळ्यांनी बघायचं रं,
रातभर सजणा जागायचं रं !

कुणी नाही इथं हिरव्या रानात,
गुलाबी गुपीत सांग माझ्या कानात
खसखस पिकली पिंपळ पानात
खुदकन मनात हसायचं रं,
टपोरं डोळ्यांनी बघायचं रं,
रातभर सजणा जागायचं रं !

तेजाचा पाऊस भुईवर पडतोय,
प्रितीचा पारवा नभात उडतोय
फेर धरी चांदवा नाचते पुनवा,
रंगात ढंगात नाचायचं रं,
टपोरं डोळ्यांनी बघायचं रं,
रातभर सजणा जागायचं रं !
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गीत     -     पी. सावळाराम
संगीत -     स्‍नेहल भाटकर
स्वर -     आशा भोसले,  दशरथ पुजारी
चित्रपट-    मानला तर देव (१९७०)

तुझा असाच गोडवा


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स्वर/संगीत : भीमराव पांचाळे