अकेला हूं मैं

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Once again a "commonly unheard" song sung by Kishore Kumar and my special 'naman' to one of the unparalleled legend Kishore Da




जीना यहाँ मरना यहाँ

Aaj Mujhe Jal Jaane Bhi Do

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Tere Bagair
Singer: Kishore Kumar
Composer: Madan Mohan
Lyrics: Naqsh Lyallpuri

गोंयां येवचें अशें

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गीत : डॉक्टर भीकाजी घाणेकार
संगीत : पं. जितेंद्र अभिषेकी
स्वर : अजीत कडकडे

अमरैयाँ के...

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कुच्छ दूर चलो

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कुछ दूर हमारे साथ चलो हम दिल की कहानी कह देंगे
समझे ना जिसे तुम आँखों से वो बात ज़बानी कह देंगे

फूलों की तरह जब होंठों पर इक शोक तबस्सुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में इक बात पुरानी कह देंगे

इज़हार-ए-वफ़ा तुम क्या समझो इक़रार-ए-वफ़ा तुम क्या जानो
हम ज़िक्र करेंगे गैरों का और अपनी कहानी कह देंगे

मौसम तो बड़ा ही ज़ालिम है तूफान उठाता रहता है
कुछ लोग मगर इस हलचल को बदमस्त जवानी कह देंगे
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नज़्म : कुछ दूर हमारे साथ चलो
फनकार : हरिहरन और आशा भोसले

गुरु-शिष्य

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राग : दरबारी
गुरु : पं. भीमसें जोशी
शिष्य : उस्ताद रशीद ख़ान

झूम बराबर झूम शराबी

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ऐसी आँखें नहीं देखीं

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जरा सी भूल

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माझिया प्रियाला प्रीत कळेना

आमची सेजारी

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दु:ख कोणांक चुकना

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दु:ख कोणांक चुकना
संसाराची ताप नासतना
पूर्वपुण्य पिकना

हरिश्‍चंद्र भवजाळी पडलो
परोपरीन वनवन विडविडलो
बायल, पूत, धन, राज्य व्हगडलो
लागुन ह्या मायणा

जल्ले व्हेल्ले घर आसुन उंचेले
शितेक पळेया कितले भोगले
घोव देव आसून हुल्पली
जावन भयो दैना

देवपुता पाडवा अतिरथी
वश जाल्लो साक्षात श्रिपती
साह्य आसुन संसारसारथी
पडले सामके उदणा

व्हडाव्हडची ही असली गति
कुळक्षयय खर भोगालो श्रीपती
पळवन पुण हे मनिस अल्पमती
रतिभरय शिकता

भोग जिवा सन्सारयातना
असलो योग परतून येवचो ना
जळ् ळ्याबगर हे शास्त्र उमजना
तातली जोत जिभना
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गीत : बाकिबाब बोरकार
संगीत : पं. जितेंद्र अभिषेकी
स्वर : अजीत कडकडे

त्या दिसा वडा कडेन

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त्या दिसा वडा कडेन गडद तिनसना
मंद मंद वाजत आयली तुजी गो पांयजणा

मौन पडले सगल्या रानां
शिरशिरून थांबलिं पानां
कंवळी जाग आयली तणा झेमता झेमतना

पैसुल्यान वाजलि घांट
दाटलो न्हयेचो कंठकांठ
सांवळ्यानी घमघमाट सुटलो त्या खिणा

फुललो वैर चंद्र ज्योती
रंध्रांनी लागल्यो वाती
नवलांची जावंक लागलीं शकून लक्षणा

गळ्यान सुखां, दोळ्यान दुकां
लकलकली जावन थिकां
नकळटना एक जालीं आमी दोगाय जाणा

वडफळांच्या अक्षतांत
कितलो वेळ न्हायत न्हायत
हुपले कितले चंद्रलोक इंद्रनंदना

तांतले काय नुल्ले आज
सगले जिणेक आयल्या सांज
तरीय अकस्मात तुजी वाजली पांयजणा

कानसुलांनी भोंवता भोंवर
आन्गार दाट फुलंति चंवर
पडटी केन्ना सपनां तींच घडटी जागरणा
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RAAG BHAIRAVI


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Raag Jaunpuri | राग जौनपुरी


एक राज़ (१९६३)


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अगर सुन ले तो इक नगमा हुज़ुर-ए-यार लाया हुउँ
वो काली चटकी की दिल टुउता पर इक झंकार लाया हुउँ
अगर सुन ले तू एक नगमा

मुझे मालूम है इतना की मैं क्या मेरी क़ीमत क्या
जो सब कुच्छ था जो कुच्छ भी नहीं ऐसा प्यार लाया हुउँ
अगर सुन ले तू इक नगमा

अचानक आ गिरी बिजली तो फिर सुरत यही निकली
उजाड़ गया दिल तो अब ज़कमों का गुलज़ार लाया हुउँ
अगर सुन ले तू इक नगमा

अजब हुउँ मैं भी दीवाना अजब है मेरा नज़राना
के उनके लिए अपनी वफ़ा का टुउता हार लाया हुउँ
अगर सुन ले तू इक नगमा
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Caricaturas

Essential for Every INDIAN

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...such are applied to all SOCIAL-POLITICAL-INDIVIDUAL India, and critically tilted toward vote bank politics and politicians.

थांबै दुखांच्यो माळा

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गीत : बाकिबाब बोरकार
संगीत : पंडित जितेंद्र अभिषेकी
स्वर : अजीत कडकडे

भेट तुझी माझी स्मरते

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भेट तुझी माझी स्मरते, अजून त्या दिसाची
धुंद वादळाची होती रात्र पावसाची

कुठे दिवा नव्हता, गगनी एकही न तारा
आंधळ्या तमातून वाहे, आंधळाच वारा
तुला मुळी नव्हती बाधा, भितीच्या विषाची

क्षुद्र लौकिकाची खोटी झुगारुन नीती
नावगाव टाकून आली अशी तुझी प्रीती
तुला परी जाणिव नव्हती, तुझ्या साहसाची

केस चिंब ओले होते, थेंब तुझ्या गाली
ओठांवर माझ्या त्यांची किती फुले झाली
श्वासांनी लिहीली गाथा, प्रीतीच्या रसाची

सुगंधीच हळव्या शपथा, सुगंधीच श्वास
स्वप्नातच स्वप्न दिसावे तसे सर्व भास
सुखालाही भोवळ आली मधुर सुवासाची
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गीतकार: मंगेश पाडगांवकर
गायक: अरुण दाते
संगीतकार: यशवंत देव

राग छायानट

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ल्हान असली जरीवाट...

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कवी : डॉ. भिकाजी घाणेकार
संगीत : पंडित जितेंद्र अभिषेकी
स्वर : अजित कडकडे

सखी मंद झाल्या तारका

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सखी मंद झाल्या तारका, आता तरी येशील का ?

मधुरात्र मंथर देखणी, आला तशी सुनी
हा प्रहर अंतिम राहिला, त्या अर्थ तू देशील का ?

हृदयात आहे प्रीत अन् ओठात आहे गीतही
ते प्रेमगाणे छेडणारा, सूर तू होशील का ?

जे जे हवेसे जीवनी, ते सर्व आहे लाभले
तरीही उरे काही उणे, तू पूर्तता होशील का ?

बोलावल्यावाचूनही मृत्यु जारी आला इथे
थांबेल तोही पळबरी, पण सांग तू येशील का ?
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गीत : सुधीर मोधे
संगीत : राम फाटक
स्वर : पंडित भिसेन जोशी (पुणे आकाशवाणीवरील प्रथम प्रसारण)

बात करनी मुझे...

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बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब हैं तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी

ले गया छ्चीन के कौन आज तेरा सब्र-ओ-क़रार
बेक़रारी तुझे आई दिल कभी ऐसी तो न थी

चश्म-ए-क़ातिल मेरी दुश्मन थी हमेशा लेकिन
जैसे अब हो गई क़ातिल कभी ऐसी तो न थी

उन की आँखों ने खुदा जाने किया क्या जादू
के तबीयत मेरी मया_इल कभी ऐसी तो न थी

अक्स-ए-रुख्ह-ए-यार ने किस से है तुझे चमकाया
तब तुझ में माह-ए-कामिल कभी ऐसी तो न थी

क्या सबब तू जो बिगड़ता है “ज़फ़र” से हर बार
खु तेरी हूर-ए-शमा_इल कभी ऐसी तो न थी
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शायर : बहादुर शाह ज़फ़र
फनकार : मेहदी हसन

गोजाली

सोबित सौनसार

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संपली कहाणी माझी

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गीत : शांता शेळके
गायक : सुधीर फडके
संगीत : सुधीर फडके

रिश्ता

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रिश्ता क्या है तेरा मेरा, मैं हूं शब और तू है सवेरा

तू है चाँद सीटोरोँ जैसा, मेरी किस्मत घोर अंधेरा

फूलों जैसे राहें तेरी, काटो जैसा मेरा डेरा

आता जाता है ए जीवन, पल-दो-पल का रैन बसेरा

(*ऎ मेरी मेहजबीन*)

अवेळीच केव्हा दाटला अंधार

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अवेळीच केव्हा दाटला अंधार
तिच्या गळा जड झाले काळे सर
एकदा मी तिच्या डोळ्यात पाहिले
हासताना नभ कळून गेले

पुन्हा मी पाहिले तिला अंगभर
तिच्या कासोळीला चांदण्याचा जर
आणि माझा मला पडला विसर
मिटीत थरके भरातील ज्वार

कितीक दिसांची पुन्हा ती भेटली
तिच्या ओटी कुण्या राव्याची साउली
त्या डोळियात जरा मी पाहिले
काजळात चंद्र पुडून गेले
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गीत : ना. धो. महानोर
संगीत व स्वर : श्रीधर फडके


सलाम कीजिए

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कोइना हो या सोनिया हो
ममता की आंचल हो या मायावती जाल...

उन्हे सलाम कीजिए !!!

ओ मृगनयनी चंद्रमुखी


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ओ मृग नयनी चंद्र मुखी, मैं हु तेरा प्रेम दिवाना
सून रतीय मन बतिया मेरे ओ सून रतिया मेरे
मुझे तू भूल ना जाना आ आ आ आ आ ........
मृग नयनी चान्रामुखी
जब जब मेरे नैनो से उलझे मद भर तेरे नैना
तब तब मन मै मेहेक उठे पहले सुहाग की रैना
आ आ आ आ आ आ
मृग नयनी चंद्र मुखी ....
आरमा याही है हाथो से तेरे पान सदा खाऊ रे
तेरी बाहो मी सांस लु मैं चरणो पे मर जाऊ रे
ओ मेरी जान फिर ऐसी कभी बात जुबान पे ना लाना २
साथ जिए है साथ मरेंगे गाते गाते गाना
मृग नयनी चंद्र मुखी ....
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चलचित्र : रंग बिरंगी
डाइरेक्टर : हृषिकेश मुखेर्जी
संगीतकार : राहुल देव बर्मन
गीतकार : योगेश
स्वर : डॉक्टर. वसंतराव देशपांडे और फ़ैयाज़

हंगामा

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When I first heard ghazals I knew only Pankaj Udaas. But during the time of Marathi Sahitya Sammhelan, on the pave lawn of Kala Academy in Panaji, the chairperson was (at that time) Ranjit Desai. He and his wife, Madhavi Desai, were staying at Hotel Samraat in Panaji. During that period, he noticed that I was hearing the ghazals sung by Pankaj Udaas on my walkman player. He told me to stop it and gave me a different ghazal cassette instead. I realized that my perspective of ghazals voluminously changed and that too entirely. Here is the first that I heard, cherished, enjoyed and shared with all who will love it too, sung and composed by nun other the Ghulaam Ali !!!
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हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं डाला चोरी तो नही की है

ना-तजुर्बाकारी से वाइज़ की ये बातें है
इस रंग को क्या जाने पुउछो तो कभी पी है

उस मई से नहिी.न मतलब दिल जिस से हो बेगाना
मक़सूद है उस मई से दिल ही में जो खिचकी है

वह दिल में की सदमे दो या जी में के सब सह लो
उन का भी अजब दिल है मेरा भी अजब जी है

हर ज़र्रा चमकता हैं अंवार-ए-इलाही से
हर साँस ये कहती हैं हम हैं तो खुदा भी हैं

सूरज में लगे धब्बा फितरत के करिश्मे हैं
बुत हम को कहें काफ़िर अल्लाह की मर्ज़ी हैं
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शायर : अकबर अल्लहाबादी
फ़नकार: गुलाम अली


"मौसम" का दूसरा पेहेलू

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दिल डूंडता हैं फिर वही फुर्सत के रात दिल
बैठे राहे तसव्वुर-ए-जाना कीये हुए....
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गीतकार: गुलझार
संगीतकार: मदन मोहन
स्वर: भुपेंदर और लता मंगेशकर
निदेशक: गुलझार
चलचित्र: मौसम


चुपके चुपके रात दिन

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चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
उन्को अब तक आशिक़ुई का वोह जमाना याद है

खेंच ले ना वोह मेरा परदे का कोना दफ्फतन
और दुप्पटे से तेरा वोह मूह छुपाना याद है

दो पहेर की धूप में मेरे बुलाने के लिये
वोह तेरा कोठे पे नन्गे पाव आना याद है

हुमको अब ताक आशिक़ुई का वोह जमाना याद है
चुपके चुपके रात दिन आंसू जमाना याद है
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چپکےچپکےرات دن آنسو بہانا یاد ہے
اُنکو اب تک آشکئی کا وہہ جمانا یاد ہے

کھینچ لےنا وہہ میرا پرد کا کونا دپھپھتن
اؤر دپپٹےسےتیرا وہہ موہ چھپانا یاد ہے

دو پہیر کی دھوپ میں میرےبلانےکےلیے
وہہ تیرا کوٹھےپےننگےپاو آنا یاد ہے

ہمکو اب تاک آشکئی کا وہہ جمانا یاد ہے
چپکےچپکےرات دن آنسو جمانا یاد ہے


दिये जलते हैं

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दिए जलते हैं, फूल खिलते हैं,
बड़ी मुश्किल से, मगर, दुनिया में दोस्त,
मिलते हैं, दिए जलते हैं

जब जिस वक़्त किसी का, प्यार जुड़ा होता है,
कुच्छ ना पूच्छो, यारों दिल का, हाल बुरा होता है,
दिल पे यादों के जैसे, तीर चलते हैं, अहन्हा

इस रंग रूप पे देखो, हरगिज़ नाज़ ना करना,
जान भी माँगे, यार तो देदे ना, नाराज़ ना करना,
रंग उड़ जाते हैं, धूप ढलते हैं

दौलत और जवानी, एक दिन खो जाती हैं,
सच कहता हून, सारी दुनिया, दुश्मन हो जाती है,
उम्र भर दोस्त लेकिन साथ चलते हैं
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जिनके होटो पे हसीं

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जिनके होंठों पे हँसी पाँव में छ्चाले होंगे
हां वोही लोग तुम्हें डून्डते वाले होंगे...
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गुलाम अली


सोचते और जागते...

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सोचते और जागते साँसों का एक दरिया हून मैं,
अपने गुलदस्ता किनरो के लिए बहता हू मैं

जल गया सारा बदन, इन मासूम की आग मे,
एक मासूम रूह का है, जिसमें अब ज़िंदा हू मैं

मेरे होंटो का तबसूम, दे गया धोका तुझे,
तुमने मुझको बाग जाना, देखले सहारा हू मैं.

देखे मेरी पजीराई को आब आता है कौन,
लम्हा भर तो वक़्त की, दहलीज़ पर आया हू मैं.
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फनकार / मौसीकार : गुलाम अली

ये न थी हमारी क़िस्मत

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ये न थी हमारी क़िस्मत के विसाल-ए-यार होता
یہ نہ تھی ھماری کسمت کےوسال - ئی - یار ھوتا
(it was not in my fate to meet my lover)

अगर और जीते रहते यही इंतेज़ार होता
اَگر اور جیتےرہتےیہیانتیجار ھوتا
(had I lived longer, this would still be my only desire)

तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
تیرےواد پر جئی ھم تو یہ جان جھوٹ جانا
(to live on your promise is to make my life a lie)

के खुशी से मार ना जाते अगर एइतबार होता
کےخوشی سےمار نا جاتےاگر ئیئتبار ھوتا
(would I not have died of happiness if i trusted it)

तेरी नाज़ुकी से जाना के बँधा था एहेड_बूड़ा
تیری ناجکی سےجانا کےبندھا تھا ئیہیڈ_بوڑا
(from your frailty I learn that the promise was delicate)

कभी तू ना तोर सकता अगर ऊस्तुवार होता
کبھی تو نا تور سکتا اگر اُوستوار ھوتا
(it would not stand broken had you been determined)

कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीम्कश को
کوئی میرےدل سےپوچھےتیرےتیر - ئی - نیمکش کو
(someone ask me about your half-drawn arrow)

ये खलिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता
یہ کھلش کہاںسےھوتی جو جگر کےپار ھوتا
(would i even feel this pain if it had pierced my heart)

ये कहाँ की दोस्ती है के बने हैं दोस्त नासेह
یہ کہاںکی دوستی ہے کےبنےہیں دوست ناسیہ
(what kind of friendship is this, that friends are now advisers)

कोई चारसाज़ होता, कोई घम्गुसार होता
کوئی چارساج ھوتا , کوئی گھمگسار ھوتا
(someone should ease my pain, someone sympathize with me)

राग-ए-संग से टपकता वो लहू की फिर ना थमता
راگ - ئی - سنگ سےٹپکتا وہ لہو کی پھر نا تھمتا
(from every nerve drips blood without restraint)

जिसे गम समझ रहे हो, ये अगर शरार होता
جسےگم سمجھ رہےھو , یہ اگر شرار ھوتا
(as if that which you think is anguish is but a spark)

गम अगरचे जान_गुलिस है, पेर कहाँ बचाईन के दिल है
گم اَگرچےجان_گلس ہے , پیر کہاںبچائین کےدل ہے
(threatening as love is, there is no deliverance from the heart)

गम-ए-इश्क़ गर ना होता, गम-ए-रोज़गार होता
گم - ئی -اشک گر نا ھوتا , گم - ئی - روزگار ھوتا
(if not the torment of love, it would be the torment of life)

कहूँ किस से मैं के क्या है, शब-ए-गम बुरी बला है
کہوںکس سےمیںکےکیا ہے , شب - ئی - گم بری بلا ہے
(whom shall I narrate the pangs of these evenings of sorrow)

मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता
مجھےکیا برا تھا مرنا اگر ایک بار ھوتا
(i would have not resented this death, had it come only once)

हुए मर के हम जो रुसवा, हुए क्यों ना घर्क़-ए-दरिया
ہوئی مر کےھم جو رسوا , ہوئے کیوںنا گھرک - ئی - دریا
(that I died and was disgraced, why was I not just drowned)

ना कभी जनाज़ा उठता, ना कहीं मज़ार होता
نا کبھی جناجا اُٹھتا , نا کہیںمجار ھوتا
(never was there a funeral, no where was a tomb erected)

उसे कौन देख सकता के यगाना है वो यकता
اُسےکون دیکھ سکتا کےیگانا ہے وہ یکتا
(who can see him since his Oneness is without peer)

जो डूई की बू भी होती तो कहीं दो चार होता
جو ڈوئی کی بو بھی ھوتی تو کہیںدو چار ھوتا
(even the scent of his duality would be an introduction)

ये मसायल-ए-तसव्वफ, ये तेरा बयान ग़ालिब
یہ مسایل - ئی - تسووپھ , یہ تیرا بیان گالب
(this mysticism, these statements of yours Ghalib)

तुझे हम वाली समझते, जो ना बाद-ख्वार होता
تجھےھم والی سمجھتے , جو نا بعد - کھوار ھوتا
(you would be a saint, if only you were not inebriated)
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साहिबा बेगम अक्तर




दुनियावालों

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या दिल की सुनो दुनियावालों
या मूज़ को अभी चूप रहने दो
मैं गम को खुशी कैसे कह दू
जो कहते हैं उनको कहने दो

ये फूल चमन में कैसा खिला
माली की नज़र में प्यार नही
हसते हुए क्या क्या देख लिया
अब बहते हैं आँसू बहाने दो

एक ख्वाब खुशी कॅया देखा नही
देखा जो कभी तो भूल गये
माँगा हुआ तुम कुच्छ दे ना सके
जो तुम ने दिया वो सहने दो

क्या दर्द किसी कॅया लेगा कोई
इतना तो किसी में दर्द नही
बहते हुए आँसू अओर बहे
अब आएसी तसल्ली रहने दो

एक ग़ज़ल दो परिप्रेक्ष्य अंदाज़



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जगजीत सिंग
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ग़ुलाम अली
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थोदासा हट के...

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हमीद आली खान
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कल चौदवी की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कुछ ने कहा यह चाँद है
कुछ ने कहा चेहरा तेरा

हम भी वहीं मौजूद थे
उन्से भी सब पूच्छा किए
हम भी वहीं मौजूद थे
हुंसे भी सब पूच्छा किए

हम हस दिए, हम चुप रहे
मंज़ूर था परदा तेरा
कल चौदवी की रात थी
इस शहेर में किससे मिले

उनसे तो छूती महफिलें
इस शहेर में किससे मिले
उनसे तो छूती महफिलें
हर शक्स तेरा नाम ले

हर शक्स दीवाना तेरा
कल चौदवी की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कल चौदवी की रात थी

कूंचे को तेरे छ्चोड़कर
जोगी ही बन जाए मगर
कूंचे को तेरे छ्चोड़कर
जोगी ही बन जाए मगर

जंगल तेरे, परबत तेरे
बस्ती तेरी, सहेरा तेरा
कल चौदवी की रात थी
बेदर्द सुन्नी हो तो चल

कहता है क्या अच्छि गाज़ल
बेदर्द सुन्नी हो तो चल
कहता है क्या अच्छि गाज़ल
आशिक़ तेरा, रुसवाँ तेरा

शायर तेरा, इंशा तेरा
कल चौदवी की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कल चौदवी की रात थी

में ना हिन्दू न मुसलमान


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में ना हिन्दू न मुसलमान मुझे जीने दो,
میں نا ھندو نہ مسلمان مجھےجینےدو
दोस्ती है मेरा इमान मुझे जीने दो.
دوستی ہے میراامان مجھےجینےدو

कोई एहसान न करो मुझपे तो एहसान होगा,
کوئی ئیہسان نہ کرو مجھپےتو ئیہسان ھوگا
सिर्फ इतना करो एहसान मुझे जीने दो.
سرپھاتنا کرو ئیہسان مجھےجینےدو

सबके दूख दर्द को अपना समझ के जीना,
سبکےدوکھ درد کو اپنا سمجھ کےجینا
बस यही है मेरा अरमान मुझे जीने दो
بس یہی ہے میرا اَرمان مجھےجینےدو
लोग होते हैं जो हैरान मेरे जीने से,
لوگ ھوتےہیں جو حیران میرےجینےسی
लोग होते रहे हैरान मुझे जीने दो.
لوگ ھوتےرہےحیران مجھےجینےدو
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Lyrics : Shahid Kabir
शायर : शाहिद कबीर
شایر : شاہد کبیر
Music : Talat Aziz
संगीत : तलत अज़ीज़
سنگیت : تلت اَجیج
Singer : Jagjit Singh
स्वर : जगजीत सिंग
سور : جگجیت سنگ

मौत ना आई





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रात गयी कर तारा तारा,
رات مندرجہ ذیل کر تارا تارا
होया दिल दा दर्द अधारा,
ہویا دل دا درد اَدھارا

आखा होइया हंजू हंजू,
آکھا ھوئیا ھنجو ھنجو
दिल दा शीशा परा परा,
دل دا شیشا پرا پرا

हूँ ता मेरे दो ही साथी,
ہوںتا میرےدو ھی ساتھی
एक होका एक हंजू खरा,
ئیک ھوکا ایک ھنجو کھرا

मरना चाहा मौत ना आई,
مرنا سایہ موت نا آئی
मौत वी मैनउ दे गयी लारा
مؤت وی میناُ دے مندرجہ ذیل لارا
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ਰਾਤ ਗਯੀ ਕਰ ਤਰਾ ਤਰਾ,
ਹੋਯ ਦਿਲ ਦਾ ਦਰਦ ਆਧਾਰਾ,

ਆਖਾ ਹੋਇਿਆ ਹੰਜੂ ਹੰਜੂ,
ਦਿਲ ਦਾ ਸ਼ੀਸ਼ਾ ਪਾੜਾ ਪਾੜਾ,

ਹੁਣ ਤਾ ਮੇਰੇ ਦੋ ਹੀ ਸਾਥੀ,
ਏਕ ਹੋਕਾ ਏਕ ਹੰਜੂ ਖੜਾ,

ਮਾਰਨਾ ਚਹਾਯਾ ਮੌਤ ਨਾ ਆਈ,
ਮੌਤ ਵੀ ਮੈਨੂ ਦੇ ਗਾਯੀ ਲਾਰਾ
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स्वर/संगीत : जगजीत सिंग
سور/سنگیت : جگجیت سنگ
ਸ੍ਵਰ/ਸੰਗੀਤ : ਜਗਜੀਤ ਸਿੰਘ

संया रूठ गये

राग बिलासखानी तोड़ी | Raag Bilaaskhaani ToDi

परदेस


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Many times I do get confused as to which would (or could) be the language more comfortable to ‘very’ individual, first in a ‘country-wise’ way followed by across the border and beyond. In may ways I am in a ‘limited’ frame, whether by region, country or beyond. So I decided to use (in this particular context) in a common ‘international’ language in a desi style the emphasis is on local word called ‘hinglish’.

In my ‘half’ the life, beginning from the tender age of 6, music, and more particularly towards the ‘hindustaani thaaT’, I was more accustomed in a mid and north Indian environment. I was certainly to see, watch, hear as well ‘take signature’ of various Ustaad’, Begum’ and Pandit’ such as Pandit Bhimsen Joshi, Pandit Jasraaj, Pandit Vishwamohan Bhat, Pandit Mallikarjoon Mansoor, Ustaad Nijamuddin (tablaa), Begum Parvin Sultaan and any others. And yet, there are many others who are in my collections, I have not been so lucky to meet or see ‘face-to-face’ with several such. One of such is Pandit Ajay Pohankar. I have watched, heard in several Cds, concerts such as Sawai Gandharv in Pune and Kesarbai Kerkar in Goa. But ‘not’ in a ‘closer’ “feelings” of meeting face-to-face. Several times in the recent t.v. channels, I did watch him in the ‘Saa Re Ga Ma Pa’ some months ago. Followed by some selective purchase of CDs too.

I present an additional (amongst many) a Thumri (once again), in an expressive view of one amongst many thumris, by Pandit Ajay Pohankar.

The expressions variates in from forms of love and expressions along with the different change as well feelings in fluctuating seasons connected with ‘loss’ of togetherness, far from reality.
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पंडित अजय पोहनकर

सभी प्यार करते हैं


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ज़िदगी में तो सभी प्यार किया करते हैं
جدگی میں تو سبھی پیار کیا کرتےہیں
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा
میںتو مرکر بھی میری جان تجھےچاہونگا

तू मिला है तो ये एहसास हुआ है मुझको
تو ملا ہے تو یہ احساس ہوا ہے مجھکو
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है
یہ میری عمر موہببت کےلئے تھوڑی ہے
एक ज़रा सा ग़म-इ-दौरान का भी हक है जिस पर
ئیک زرا سا گم -ا - دوران کا بھی ھک ہے جس پر
मैंने वो सांस भी तेरे लिए रख छोड़ी है
میںنے وہ سانس بھی تیرےلئے رکھ چھوڑی ہے
तुझ पे हो जाऊँगा कुर्बान तुझे चाहूँगा
تجھ پےھو جااُونگا کربان تجھےچاہونگا
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा
تجھ پےھو جااُونگا کربان تجھےچاہونگا

अपने जज़्बात में नगमात रचाने के किये
اَپنےجزبات میں نگمات رچانےکےکیہ
मैंने धड़कन की तरह दिल में बसाया है तुझे
میںنے دھڑکن کی طرح دل میں بسایا ہے تجھی
मैं तसव्वुर भी जुदाई का भला कैसे करून?
?میںتسوور بھی جدائی کا بھلا کیسےکرون
मैंने किस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे
میںنے کسمت کی لکیروںسےچرایا ہے تجھی
प्यार का बनके निगेहबान तुझे चाहूंगा
پیار کا بنکےنگیہبان تجھےچاہونگا
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूंगा
میںتو مرکر بھی میری جان تجھےچاہونگا

तेरी हर चाप से जलते हैं खायालूँ में चिराग
تیری ھر چاپ سےپانیتےہیں کھایالوںمیں چراگ
जब भी तू आये जगाता हुआ जादू आये
جب بھی تو آمدنی جگاتا ہوا جادو آیہ
तुझको छूलूं तो ए जान-इ-तमन्ना मुझको
تجھکو چھولوںتو ئی جان -ا - تمننا مجھکو
देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आये
در تک اپنے بدن سےتیری خوشبو آیہ
तू बहारों का है उन्वान तुझे चाहूंगा
تو بہاروںکا ہے اُنوان تجھےچاہونگا
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूंगा
میںتو مرکر بھی میری جان تجھےچاہونگا
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शायर : कतील शिफाई
फ़नकार : मेंदी हसन

घर असावे


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ह्या भावगीता मागे माझ्या काही खास आठवणी...
पुण्याच्या नगरीत माझी पहिली १९९०-१९९१ च्या सुमारास झाली. कोकणाच्या ऐयर-गैर ग्रॅजुयेशन पर्यंत गोव्यात होतो. घराच्या चार चवकठात खुल्या मानाने बोलण्याची संधी जवळ जवळ नसल्यातच जमा. मग, गाणे अयकणे, बघणे हाच एक उपाय होता. पण जेव्हा पुण्यात आलो, पहिली पुणे केम्प मधील हिन्दी शाळेतले मुख्य प्राध्यापक सुधाकर प्रभू काकांकडे रहायचो. इथून आयुषाचे नवीन अ-ब-क-ड चालू झाले. त्या सुमारास, प्रभात रोडला एका झेरॉक्ष च्या दुकानात मल्टिपल प्रिंट करून ठेवलेली कविता मनात टपली. मनात कायमची राहिलेली ही कविता आणि ३ खास लोकांकडून मला असंख्य मानसिक बळ, आधार, चेतना आणि एक नवीन जिध्ह असंख्य पणे वाडली. एक शिक्षक, गुरू बरोबर एक मित्र ह्या नात्याने सुध्हा असंख्य प्रेम त्यांच्याकडून मला मिळाले. प्रा. सुधाकर काका कायम हसमुक असायचे. दुसरे म्हणजेच भैईया वैद्य. त्यावेळेस ते डेक्कन बधील आपटे शाळेचे मुख्य प्राध्यापक होते. भैईया काका कायम म्हणायचे 'आपल्या जिध्हिने पुढे चाल, जग तुझ्या मागे येईल'. पोस्ट ग्रॅजुयेशन करताना तीसरे खास म्हणजेच डॉ. शेजवलकर !!!
आणि आयुषाच्या प्रत्तेक टप्प्यात ती कविता व ते तीन 'मित्र', नसा नसात जिवंत राहीले. बर्‍याच वर्षानंतर जेव्हा ती कविता व त्याचे स्वर/संगीत अयकले की जुन्या आठवणी उजणतात. फेसबुक वर स्टिल इमेज पधतिने रिलीस केली होती. पण पुन्हा एकदा पूर्ण विडियो द्वारे. त्याही बरोबार त्या तीन 'मैत्र' व गुरू प्राध्यापकांना शतः प्रणाम!
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घर असावे घरा सारखे, नकोच नुसत्या भिंती
इथे असावे प्रेम जिव्हाला, नकोच नुसती नाती.

त्या शब्दांना अर्थ असावा, नकोच नुसती वाणी
सूर जुळावे परस्परांचे, नकोत नुसती गाणी

त्या अर्थाला अर्थ असावा, नकोत नुसती नाणी
अश्रुतुनही प्रित झरावी, नकोत नुसते पाणी

या घर्ट्यातून पिल्लू उडावे, दिव्या घेउनी शक्ति
आकांक्षाचे पंख असावे, उंबरठ्यावर भक्ति


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गीत : विमल लिमये
स्वर/संगीत : श्रीधर फडके


फ़ासले | پھاسلے


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फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
پھاسلے ایسی بھی ھونگےیہ کبھی سوچا نہ تھا
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
سامنے بیٹھا تھا میرےاور وہ میرا نہ تھا

वो की खुशबू की तरह फैला था मेरे चार सु
وہ کی خوشبو کی طرح پھیلا تھا میرےچار س
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था
میںاُسےمحسوس کر سکتا تھا چھو سکتا نہ تھا

रात भर उस की ही आहट कान में आती रही
رات بھر اُس کی ھی آہٹ کان میں آتی رہی
झाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था
جھانک کر دکھا گلی میں کوئی بھی آیا نہ تھا

अक्स तो मौजूद थे पर अक्स तन्हाई के थे
اَکس تو موجود تھےپر اَکس تنہائی کےتھی
आइना तो था मगर उस में तेरा चेहरा न था
آئنا تو تھا مگر اُس میں تیرا چہرا نہ تھ

आज उस ने दर्द भी अपने अलहेदाह कर दिए
آج اُس نےدرد بھی اپنے اَلہیداہ کر دئی
आज मैं रोया तो मेरे साथ वो रोया न था
آج میںرویا تو میرےساتھ وہ رویا نہ تھا

ये सभी विरानियाँ उस के जुदा होने से थीं
یہ سبھی ورانیاں اُس کے جدا ھونے سے تھین
आँख धुंधलाई हुई थी शहर धुन्धलाया न था
آنکھ دھندھلائی ہوئی تھی شہر دھندھلایا نہ تھا

याद करके और भी तकलीफ होती थी अदीम
یاد کرکے اور بھی تکلیپھ ھوتی تھی اَدیم
भूल जाने के सिवा अब कोई भी चाराह न था
بھول جانے کے سوا اب کوئی بھی چاراہ نہ تھا
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शायर : आदीं हाशमी
شایر : آدیںھاشمی
फ़नकार : गुलाम अली
فنکار : گلام اَلی
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faasle aise bhii ho.nge ye kabhii sochaa na thaa
saamane baiThaa thaa mere aur vo meraa na thaa

vo ki Khushbuu kii tarah phailaa thaa mere chaar suu
mai.n use mahasuus kar sakataa thaa chhuu sakataa na thaa

raat bhar us kii hii aahaT kaan me.n aatii rahii
jhaa.Nk kar dekhaa galii me.n ko_ii bhii aayaa na thaa

aks to maujuud the par aks tanahaa_ii ke the
aa_iinaa to thaa magar us me.n teraa cheharaa na thaa

aaj us ne dard bhii apane alahedah kar diye
aaj mai.n royaa to mere saath vo royaa na thaa

ye sabhii viiraaniyaa.N us ke judaa hone se thii.n
aa.Nkh dhu.Ndhalaa_ii hu_ii thii shahar dhu.Ndhalaayaa na thaa

yaad karake aur bhii takaliif hotii thii ‘Adeem’
bhuul jaane ke sivaa ab ko_ii bhii chaaraah na thaa

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Lyrics by Adeem Hashmi
Fankaar by Gulam Ali

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मुका पाउस बरसावा असे वाटते



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मुका पाउस बरसावा असे वाटते
तुझा आवाज ऐकावा असे वाटते
कधी धरशील का माझ्या पुढे तू चेहरा
मलाही चंद्र स्पर्शावा असे वाटते
मुका पाउस बरसावा असे वाटते

जरा गर्दीत मी आता उभा राहतो
कुणी माणूस थांबावा असे वाटते
मुका पाउस बरसावा असे वाटते

मला मी शेवटी कळलो जरी नाही तरी ही
तुला समजून सांगावा असे वाटते
मुका पाउस बरसावा असे वाटते
तुझा आवाज ऐकावा असे वाटते

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शब्द : सौमित्र
स्वर/संगीत : मिलिंद जोशी